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यूपी चुनाव जीतने के लिए RSS का नया पैंतरा, रामलीला सभाओं में बना रहा है दलित को मुख्य अतिथि

यह समय हिंदू धर्म के सभी जातियों को एकजुट करने का है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ इस संदेश को जोर-शोर से फैला रही है और भारी संख्या में दलितों के लिए कार्यक्रम किया जा रहा है। हिंदूओं को एक करने के लिए मौन आंदोलन चलाया जा रहा है। दलितों को एकजुट करना, भेदभाव वाले जाति सामाज की बुराई को खत्म करने का प्रचार किया जा रहा है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस दशहरा में सामाजिक सद्भाव का संदेश और दलितों को हर जगह विशेष महत्व दे रहा है। हालांकि संघ अपने स्थापना (1925) के समय से ही सार्वजनिक तौर पर त्योहारों का आयोजन करता है। पर यह पहला समय है जब 2017 में होने वाले उत्तर प्रदेश के चुनाव को ध्यान में रखते हुए जातीय सद्भावना का सामाजिक संदेश बांटा जा रहा है।

आरएसएस में रविवार को दिल्ली में ‘सामाजिक समरसता विजयदशमी उत्सव’ मनाया। इस आयोजन में मेहतर दलित वाल्मीकि समुदाय के संत श्री रवि शाहू जी महाराज को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया गया। संत शाहू जी महाराज हरियाणा के गनौर में स्थित श्री भगवान वाल्मीकि अध्यात्मिक आश्रम के समन्वय हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कहना है कि एक सामाजिक कार्मिक मंदिर और एक श्मशान बनाने का काम चल रहा है। आरएसएस दिल्ली के सहायक अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि सरसंचालक मोहन भागवत यह साल सामाजिक सद्भाव के नाम समर्पित कर दिया है, और हम उन्हीं सिद्धांतों का पालन कर रहे हैं।

एमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी भी उत्तर प्रदेश में जाकर घोषणा कर चुके हैं कि इस समाज में दो ही समुदाय में हाशिए पर है और है-दलित और मुस्लिम समुदाय। उन्होंने हिंदूओं नहीं दलितों को चुना है। पिछले दिनों गुजरात में भाजपा समर्थित गौ-रक्षकों ने कई दलित विरोधी घटनाओं को अंजाम दिया। हैदराबाद यूनिवर्सिटी में रोहित वेमुला आत्महत्या के बाद मायावती ने भी आरएसएस पर दलित-विरोधी होने आरोप लगाया।

चूंकि उत्तर प्रदेश में दलितों की संख्या अधिक है। उसी को देखते हुए आरएसएस दिल्ली के कई इलाकों में दलितों को लुभाने वाला रामलीला को आयोजन कर रहा है। इस बार राजधानी में रामलीला सभाओं में रामायन के रचयिता बाबा वाल्मीकि (दलित नागा प्रजाति) को भी पूजा पंडालों में जगह दी गई है। इसके अलावा रामलीला समितियों और सभाओं में मुख्य अतिथि के रूप में स्थानीय दलित लोगों को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जा रहा है। कई सभाओं में बाबासाहेब आंबेडकर की पोस्टर-बैनर भी लगे हैं।

दिल्ली प्रांत के आरएसएस प्रचार प्रमुख राजीव तूली कहते हैं कि वामपंथियों ने प्रचार किया कि हम दलित विरोधी हैं। बाबासाहेब ने पूरी जिंदगी वामपंथी-सोशलिस्ट ब्रिगेड के खिलाफ लिखा। मगर यह विडम्बना है कि ये लोग जवाहरलाल नेहरू जैसे संस्था का दुरूपयोग कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के बहुत से लोग दिल्ली में बड़े पैमाने पर बसते हैं। राष्ट्रीय राजधानी होने की वजह से दिल्ली पर मीडिया का ध्यान अधिक रहता है। इसी को देखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व्यापक रूप से यहां यह काम कर रहा है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इसबार यूपी का चुनाव 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल होगा। उत्तर प्रदेश राज्य में लंबे समय से क्षेत्रिय दलों का वर्चस्व रहा है। खासकर पिछड़े वर्ग पर पकड़ रखने वाली समाजवादी पार्टी (सपा) और दलित नेता मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की। जबकि भाजपा 1996 से लगातार सत्ता में आने की जद्दोजहद कर रही है।

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