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यूपी निकाय चुनाव में बीजेपी की 623 में 242 सीटों पर हुई जमानत जब्त

लखनऊ। यूपी निकाय चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों ने लगभग सभी पार्टियों का गणित ही बिगाड़ कर रख दिया। मुख्य रूप से नगर पालिका और नगर पंचायत अध्यक्ष के पदों पर उनकी वजह से ही वोट बंट गए।

जिसका नतीजा यह रहा कि दूसरे व तीसरे स्थान पर जिस भी पार्टी का उम्मीदवार रहा उसकी जमानत तक जब्त हो गई। चुनाव आयोग के आंकड़े बता रहे हैं कि तीसरे नंबर पर रहने वाले दो-तिहाई से ज्यादा उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई।

नगर पंचायतों में तो भाजपा को छोड़कर बाकी प्रमुख दलों के उम्मीदवारों के आधे से लेकर तीन-चौथाई तक उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा सके हैं।

वर्ष 2012 में हुए निकाय चुनाव में बीजेपी को इतनी सीट मिली थी की इस चुनाव में उसे पाने को कुछ अधिक नहीं था। लेकिन इस निकाय चुनाव के नतीजे पर जिस लिहाज बीजेपी पार्टी आलाकमान बयानबीर बन रहे वो चुनाव आयोग के आंकड़ों की समीक्षा करने पर खोखला नजर आता है।

सच तो यह है कि महापौर व नगर निगम को अलग कर दें तो निर्दलीय उम्मीदवारों का दबदबा निकाय चुनाव में साफ नजर आ रहा है। जिसका सीधा अर्थ यह है कि वोटरों ने भाजपा सहित अन्य दलों के उम्मीदवारों को सीरे से खारिज कर दिया। भाजपा ने 652 में कुल 623 निकायों पर चुनाव लड़ा था। इसमें 242 सीटों पर उसकी जमानत जब्त हुई है।

इस हिसाब से पार्टी करीब 39 प्रतिशत सीटों पर जमानत नहीं बचा पाई है। हालांकि आंकड़ों को पदों के अनुसार देखने पर पता चलता है कि सबसे ज्यादा नगर पंचायत के उम्मीदवारों का प्रदर्शन खराब रहा और इनकी वजह से बीजेपी के जमानत जब्त होने वाले प्रतिशत में इजाफा भी नजर आ रहा है।

मेयर के किसी भी पद पर भाजपा के उम्मीदवार की जमानत नहीं हुई। नगर पालिका अध्यक्ष में भी स्थिति सामान्य थी यहां पर करीब 22 प्रतिशत उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई।

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