Sunday , December 17 2017

यूपी में तक़रीबात के दौरान फायरिंग पर अदालती इंतेबाह

इलहाबाद हाइकोर्ट ने आम मुक़ामात पर और ख़ुसूसी तौर पर तक़रीबात के दौरान हथियारों के बेजा इस्तेमाल का सख़्त नोट लेते हुए उत्तर प्रदेश के तमाम लाईसेंस कनुंदा से ख़ाहिश की है कि वो तक़रीबात के दौरान ख़ुशीयां ज़रूर मनाएं लेकिन इस के इज़ह

इलहाबाद हाइकोर्ट ने आम मुक़ामात पर और ख़ुसूसी तौर पर तक़रीबात के दौरान हथियारों के बेजा इस्तेमाल का सख़्त नोट लेते हुए उत्तर प्रदेश के तमाम लाईसेंस कनुंदा से ख़ाहिश की है कि वो तक़रीबात के दौरान ख़ुशीयां ज़रूर मनाएं लेकिन इस के इज़हार के लिए फायरिंग ना करें।

जस्टिस अब्दुल मतीन और सुधीर कुमार सक्सेना पर मुश्तमिल लखनऊ की एक डीवीजन बेंच ने फ़ौजदारी मुआमला में ये अहकामात जारी किए जिस में तक़रीबात जैसे शादियां , सालगिरा और इंतेख़ाबी कामयाबी के जश्न के दौरान लोग आतिशबाज़ी भी करते हैं, पटाख़े छोड़ने के दौरान जो सूती आलूदगी होती है, इसकी परवाह ना करते हुए लोग अब फायरिंग भी करने लगे हैं जो कई बार मोहलिक साबित होती है क्योंकि निशाना चूक जाने से कभी कभी गै़रज़रूरी अफ़राद को ज़ख्मी करने के इलावा उन्हें हलाक भी कर देती है लिहाज़ा हथियारों के लाईसेंस कुनुन्दगान से ये ख़ाहिश की जाती है कि वो तक़रीबात के दौरान फायरिंग ना करें क्योंकि ऐसा करना हथियारों के ग़लत इस्तेमाल के मुतरादिफ़ है। अगर अदालत की हिदायत की ख़िलाफ़वर्ज़ी की गई तो ख़ातियों को बख्शा नहीं जाएगा।

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