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यूपी विधानसभा चुनाव: मायावती-ओवैसी एक साथ लड़ सकते हैं चुनाव!

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के मद्दनेजर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। पार्टियों सियासी नफे-नुकसान को देखते हुए गठबंधन का मोल-भाव होना शुरु होने लगा। कयास लगाये जा रहे हैं कि दलित और मुस्लिम वोटों को एक करने के लिये बसपा और AIMIM के बीच गठबंधन हो सकता है।

हालांकि दोनो ही पार्टी की तरफ से इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बसपा अध्यक्ष मायावती AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी से गठबंधन को लेकर काफी गंभीर हैं।

लखनऊ के सियासी गलियारे में बसपा और AIMIM के बीच गठबंधन की संभावनाओं की चर्चा हो रही है।कहा जा रहा है बसपा सुप्रीमो मायावती इस बारे में कोई फैसला लेने की जल्दबाजी में नहीं हैं।मायावती ओवैसी के साथ जाने पर बसपा को होने वाले नफा-नुकसान को टटोल रही हैं। सूत्रों का कहना है कि मायावती मुस्लिम वोटरों को अपने साथ लाने के लिए ओवैसी के साथ गठबंधन कर सकती है।

क्या कहता है यूपी में दलित और मुस्लिमों का चुनावी गणित

यूपी में करीब 21 फीसदी दलित जबकि करीब 19 फीसदी मुस्लिम वोट है। इन दोनों वोटों को मिलाकर राज्य का 40 फीसदी वोट हो जाता है। ऐसे में हर दल इन वोटों पर नजर लगाए बैठा है।

दलित वोटों पर जहां मायावती की बादशाहत है तो वहीं माई समीकरण (मुस्लिम-यादव) के माहिर खिलाड़ी मुलायम सिंह यादव कहे जाते हैं। इन दोनों पार्टियों के लिए सत्ता की कुंजी मुस्लिम वोट रहा है।

जब मुस्लिम वोट मायावती की तरफ था तो उन्होंने 2007 में पूर्ण बहुमत से सरकार बना ली फिर जब यही मुस्लिम वोट 2012 विधानसभा चुनावों में सपा की तरफ झुका तो सपा ने पूर्ण बहुमत से सरकार बना ली। इन आकड़ो के मायने दोनों ही पार्टी बेहतर तरीके से समझती है, ऐसे में हर मुमकिन कोशिश कर रही है यूपी विधानसभा मुस्लिम वोट उनके पाले में गिरे।

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी की सियासत भी दलित-मुस्लिम में एकजुटता चाहती है।ओवैसी ऐसे प्रयोग हैदराबाद में भी कर चुके हैं। उन्होंने हैदराबाद के नगर निकाय चुनावों में मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में दलित कैंडीडेट उतारकर दलित-मुस्लिम समीकरण की कोशिश की है। इसके अलावा यूपी के फैजाबाद विधानसभा के उप-चुनाव में भी ओवैसी ने दलित कैंडीडेट उतारा था।

मायावती भी दलित-मुस्लिम एकता का समीकरण साधने के लिए दोनों को विधानसभा प्रभारी भी जमकर बनाया है। आपको बता दें कि बसपा में विधानसभा प्रभारी ही संभावित उम्मीदवार होता है। मायावती अपने हर भाषण में मुसलमानों को रिझाने की पूरी कोशिश करती हैं।

 

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