योगी के मंत्री ने मोदी सरकार पर गंगा सफाई के नाम पर अरबों के घोटाले का लगाया आरोप

योगी के मंत्री ने मोदी सरकार पर गंगा सफाई के नाम पर अरबों के घोटाले का लगाया आरोप

अपनी ही सरकार के खिलाफ बयानबाजी कर अकसर विवादों में रहने वाले यूपी के मंत्री ओमप्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) एक बार फिर चर्चा में हैं. हाल ही में बुलंदशहर में हुई हिंसा पर सीएम योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधने वाले राजभर ने इस बार पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अगुवाई वाली केंद्र सरकार को अपने लपेटे में लिया है. राजभर ने इस बार गंगा नदी (Ganga Cleanliness) की सफाई को लेकर अपने तल्ख तेवर जाहिर किए हैं. उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और काबीना मंत्री राजभर ने शनिवार को केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार पर गंगा नदी की सफाई के नाम पर अरबों रुपए के घोटाले का आरोप लगाया.

योगी सरकार में दिव्यांग जन सशक्तिकरण मंत्री ओ.पी. राजभर ने ‘ट्वीट’ कर आरोप लगाया कि गंगा सफाई के नाम पर अरबों रुपए का घोटाला हुआ है. उन्होंने जुलाई 2017 की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दो वर्ष में गंगा की सफाई के नाम पर सात हजार करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए, लेकिन गंगा अब भी मैली है. उन्होंने यह भी कहा, ‘‘गंगा पुत्र’ प्रोफेसर जी. डी. अग्रवाल को हमने खो दिया. अब संत गोपाल दास अग्रवाल के लिए उनका दल आवाज उठा रहा है.’’ उन्होंने सवाल किया ‘‘कहां हैं गोपाल दास?’’ उल्लेखनीय है कि गंगा की सुरक्षा के लिए अनशन कर रहे संत गोपाल दास गत पांच दिसम्बर की रात देहरादून के एक अस्पताल से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए थे.

इससे पहले ओमप्रकाश राजभर ने बुलंदशहर में कथित गोकशी के बाद भड़की हिंसा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा था. राजभर ने योगी पर आरोप लगाते हुए कहा था कि उनके लोग दंगा भडका रहे हैं जबकि वह शांति का प्रयास कर रहे हैं. राजभर ने बुलंदशहर हिंसा को लेकर हिंदूवादी संगठन बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद पर भी आरोप लगाए थे. उन्होंने कहा था कि बुलंदशहर की दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिए विहिप और बजरंग दल जिम्मेदार हैं. वे कानून का पालन नहीं करते, इसलिए ऐसे संगठनों को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए. राजभर ने अपने बयान में कहा था कि विहिप और बजरंग दल केवल हिन्दू-मुसलमान के बीच दरार पैदा करते हैं. यह सब कुछ 2019 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर हो रहा है. राजनीतिक फायदे के लिए मंदिर—मस्जिद मुद्दा उछाला जाता है.

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