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योग प्रशिक्षण केंद्र सिर्फ नाम का असल में ज़बरदस्ती धर्म वापसी की जाती है यहां जो इस्लाम या क्रिस्चन अपना लिए हैं

कन्नूर : नर्सिंग स्नातक बीस वर्षीय अशिता लक्ष्मी, केरल के कन्नूर जिले के धर्मदों नामक एक छोटे से शहर में अनूप कुमार और प्रीता से पैदा हुई। उनके पिता कन्नूर मंडल में एक वन अधिकारी हैं और उनकी मां एक शिक्षक है। अशिता ने त्रिपुनिथुरा योग केंद्र पर ज़ुल्म करने का आरोप लगाया है। ये एक घर वापसी केंद्र है, अशिता का कहना है कि हिंदू हेल्पलाइन कार्यकर्ताओं द्वारा उसे जबरन योग केंद्र में लाया गया था। छह महीने तक कमरे में बंद कर बेरहमी से पीटा गया।

अशिता का आरोप यह भी है कि योग प्रशिक्षण केंद्र केवल नाम का है लेकिन वहां असल में ज़बरदस्ती धर्म वापसी की जाती है जो इस्लाम या क्रिस्चन अपना लिए हैं। बहुत बेरहमी से लड़कियों को तेज़ संगीत बजाकर पीटा जाता है ताकि कोई उनकी आवाज़ भी न सुन सके। आरोप है कि घर वापसी करने के लिए लड़कियों को यातनाऐं दी जाती हैं।

आशिता ने केरल हाईकोर्ट के बाहर द न्यूज़ मिनिट को बताया कि वह एक नर्सिंग छात्र के रूप में एक साधारण जीवन जी रही थी, जब वह सुहाब से मिले, जो एक पत्रकार के रूप में काम करते थे। हम दोनों में प्यार हो गया और एक दूसरे से शादी करने का फैसला किया। लेकिन जब उनके माता-पिता को अपनी हिंदू बेटी और एक मुस्लिम व्यक्ति के बीच के रिश्ते की जानकारी मिली तो अशिता के घर में तनाव बढ़ता गया। उनके माता-पिता का कहना था कि कोई शादी नहीं होगी.

जब अशिता फिर भी नहीं मानी, तो उनका परिवार और अधिक आक्रामक हो गया, 29 जनवरी को, अशिता को जबरन अपने माता-पिता द्वारा त्रिपुनीथुरा के उदयम्पर में शिव शक्ति योग विद्या केंद्र में जबरन ले जाया गया। योगा केंद्र और 11 अभियुक्तों के खिलाफ दायर एक आपराधिक मामले में आशिता ने कहा कि योग केंद्र के सदस्यों ने मुझे सुहाब से शादी करने के लिए मना किया। मेरे माता-पिता योग केंद्र से कुछ पुरुषों के साथ जबरन मुझे केंद्र में ले गए मुझे याद है कि यह एक इनोवा कार थी।

आशिता याद करती है कि उन्होंने गाड़ी में ज़ोर जोर से संगीत बजाया जा रहा था ताकि मेरी चीख पुकार और रोने की आवाज बाहर न सुनाई पड़े, “जब हम योग केंद्र में पहुंचे, मैंने कार से उतरने से मना कर दिया तब उन्होंने मुझे पीटा और मुझे कार से बाहर खींच लिया और बाद में मुझे एक कमरे में बंद कर दिया। वे मुझे एक कुर्सी पर बांध कर दिन रात यातना देते रहे। यह केंद्र हर समय ज़ोर से संगीत का इस्तेमाल करता था। ”

अशिता कहती हैं, अत्याचार, कई दिनों तक जारी रहा जब तक कि हमने सुहाब के साथ संबंध खत्म कर देने की बात नही कही। 23 फरवरी को, सुहाब ने अशिता के अवैध नजरबंदियों के खिलाफ एक याचिका दायर की। अदालत ने अशिता को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने के लिए कहा। लेकिन सुहाब की याचिका को खारिज कर दिया गया क्योंकि आशिता ने कहा था कि वह अवैध रूप से नजरबंद नहीं थी और वह स्वयं अपने माता-पिता के साथ रह रही थी।

लेकिन, अशिता कहती हैं, “मैंने जो अदालत में कहा था वह सच नहीं था। मुझे ब्लैकमेल किया गया था उन्होंने सुहाब को मारने की धमकी दी थी। “उसने आरोप लगाया कि वह योगा केंद्र के निदेशक मनोज गुरुजी और अन्य स्टाफ के सदस्यों को अदालत में जाने से पहले धमकी दी गई थी। “मनोज और उनके अनुयायियों ने कोर्ट में पहुंचने से पहले मुझे ब्लैकमेल किया और धमकी दी। वे मेरे माता-पिता के साथ अदालत में आए। मैं डर गयी थी। मैंने बयान दबाव में दिया और अपने माता-पिता के साथ घर वापस जाने पर सहमत हुए। ”

अरश विद्या समाज के संस्थापक और निदेशक केआर मनोज ने शिव शक्ति योग विद्या केंद्र के बारे में उन्होंने दावा किया कि हिंदू धर्म पर पाठ्यक्रम आयोजित करता है।

योग केंद्र के लिए दूसरा दौरा

अष्टिता घर वापस चली गई, उसके परिवार और योग केंद्र द्वारा दायर की गई एक काउंटर पिटीशन से सुहाब को दबाना जारी रखा। उन्हें ‘जिहादी आतंकवादी’ के रूप में उसे चित्रित किया गया था जो एक ‘लव जिहाद’ अभियान के हिस्से के रूप में एक हिंदू लड़की से शादी करना चाहता था।

घर आने के पश्चात कई सप्ताह बाद आशिता ने फिर से सुहाब के साथ संपर्क में रह लिया। इस दंपत्ति ने 22 मार्च को भागने का फैसला किया।

आशिता के अनुसार उसके माता-पिता को इस योजना के बारे में भनक लगी। फिर आगे मुझे एक मानसिक रोगी होने के रूप में रंगाने का प्रयास किया गया। वे मुझे वद्कर में एक मनोचिकित्सक के पास ले गए और उन्होंने कहा कि मैं मानसिक रूप से बीमार हूं। 23 मार्च को, मेरे पिता के भाइयों ने मुझे एक कार में घसीटा और मुझे कुछ गोलियां दी गयी और मैं जल्द ही बेहोश हो गयी जब मैं जागी तो देखा मैं योग केंद्र में दुबारा वापस आ गयी थी।

सुहेब, दर्ज एक आपराधिक याचिका में कहते हैं कि वह जब अशिता के साथ फोन पर था, जब वह घर से बाहर थी तब उसकी दूसरी ओर रोने की आवाज सुन सकता था। सुहाब ने धर्मदुम पुलिस थाने के उप निरीक्षक को तुरंत सूचित किया और एक रिपोर्ट दायर की लेकिन पुलिस की तरफ से कहा गया कि एक मानसिक रूप से बीमार युवा महिला को वैकल्पिक चिकित्सा के लिए लिया गया है। आशिता ने अपने जीवन के अगले सात महीनों योग केंद्र में बंद कर दिए।

उस योग केंद्र में एक बड़ा घोटाला सामने आया, जहां एक महिला को महीनों केंद्र में हिरासत में रखा गया और यातनाएं दी थी। सरकार ने केंद्र को सील कर दिया जहां गार्ड को पकड़ लिया गया, इस तरह की शिकायत मिलने के बाद उच्च न्यायालय ने पुलिस को जांच करने के आदेश दिए हैं। लड़की के माता-पिता से जानकारी ली जा रही है। लड़की का कहना है कि करीब 50 अन्य लड़कियों को भी इसी तरह पीटा जाता है। डायरेक्टर मनोज सहित अन्य आरोपी भाग निकले हैं।

स्रोत : द क्विंट

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