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रमज़ान उल-मुबारक का पहला अशरा ,मसाजिद में ख़ुसूसी दुआएं

हैदराबाद 16 जून: शहर की मुख़्तलिफ़ मसाजिद में उमतुलमुस्लिमीन ने बह चशम-ए-नम माह रमज़ान उल-मुबारक के पहले अशरे को विदा किया और रब काएनात के हुज़ूर गिड़गिड़ा कर दुआएं मांगी।अशरा-ए-रहमत के इख़तेताम पर शहर की बेशतर मसाजिद में ख़ुसूसी दुआएं की गई और जिन मसाजिद में तरावीह में तीन पारे कलाम मजीद सुनाई जा रही थी वहां दुआ ख़त्मु क़ुरआन का एहतेमाम किया गया।

तारीख़ी मक्का मस्जिद में दुआ ख़त्म क़ुरआन के मौके पर सबसे बड़ा इजतेमा देखा गया जहां मौलाना हाफ़िज़ मुहम्मद रिज़वान क़ुरैशी ख़तीब-ओ-इमाम मक्का मस्जिद ने अशरा-ए-रहमत के दौरान तीन पारे कलाम मजीद सुनाई। मक्का मस्जिद के अलावा जामा मस्जिद चौक में भी दुआ ख़त्म क़ुरआन का एहतेमाम किया गया जहां मौलाना सय्यद शाह मुर्तज़ा अली सूफ़ी ने नमाज़ तरावीह में तीन पारे कलाम-उल-ल्लाह सुनाने की सआदत हासिल की।जामा मस्जिद दिल्ली दरवाज़ा नयापुल में हसबे अमल दर आमद क़दीम रईस अलहफ़ाज़ हज़रत मौलाना हाफ़िज़ शेख़ अहमद मुहीउद्दीन शरफ़ी नाज़िम-ओ-मुहतमिम दारुल-उलूम ने नमाज़ तरावीह में तीन पारे कलाम मजीद सुनाई।

उल्मा इकराम ने उमतुलमुस्लिमीन खास्कर नौजवानों से अपील की के वो रहमतों के अशरे में जिस तरह इबादतों में मसरूफ़ रहे इसी तरह अशरा-ए-मग़फ़िरत के दौरान भी अल्लाह को राज़ी करवाने की कोशिश करें।

माह रमज़ान उल-मुबारक की हर साअत इंतेहाई एहमीयत की हामिल होती है उसी लिए किसी भी साअत को फ़ुज़ूल ज़ाए करने से इजतिनाब करते हुए ज़्यादा से ज़्यादा इबातों पर तवज्जा मर्कूज़ करें।

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