Friday , January 19 2018

रसूलू ल्लाह (स.व.) के मुहतरम चाचा हज़रत हमजा (रज.)को सबक़त इस्लाम

रसूलू ल्लाह स.व.

रसूलू ल्लाह स.व. के पेगंबरी के एलान के दूसरे साल अमान(सूरख्शा) का इज़हार करने वाले हज़रत सैयदीना हमज़ा बिन अबदू ल्मूत्तलीब रज़ी इशक़ इलाही, मुहब्बत रसूल स.व.और नुसरत(सहायता) देन में मुनफ़रीद शान के हामिल(रखते ) थे औलादे हज़रत अबदू लमूत्तलीब में सबक़त इस्लाम(पहलापन) के लिहाज़ से अव्वलीयत(प्रथम्ता) का एज़ाज़ रखते थे वो ना सिर्फ रसूलू ल्लाह (स.व.) के अम्मे (चाचा) मुहतरम थे बल्कि रिज़ाई भाई होते थे क़बूलियत अमान (सुरख्शा) से ता दम शहादत हक़परसती, ताईद हबीब ए कीब्रीया और हिमायत देन में ज़िंदगी गुज़ारी हज़रत हमजा नासिर ए इस्लाम(मददगार) से मारूफ़ थे ।

हज़रत हमजा के इस्लाम लाने के कारण‌ मुस्लमानों ने अपने लिए बड़ी इज़्ज़त और क़ुव्वत महसूस की। हज़रत हमजा बिन अबदू लमूत्तलीब ने हिज्रत(मक्का छोड्ने ) के बाद राह ए ख़ुदा(इश्वर के रस्ता) में सब से पहले शहसवारी की। जब वापिस लौटे तो आप को ये बात मालूम हुई कि किस तरह अबू जहल ने हुज़ूर अनवर को सताया और तकलीफ पहुंचाई और हुज़ूर ए अकरम स.व. ने सब्र-ओ-तहम्मुल(बर्दाशत) फ़रमाया ये सुन कर हज़रत हमजा को सख़्त ग़ुस्सा आया और आप फ़ौरन(तूरंत) हरम‌ में आए जहां अबू जहल लोगों के साथ बैठा था हज़रत हमजा ने अबू ल्हकम (यानी अबू जहल) से ख़ूब इंतेक़ाम लिया।

इसी वक़्त हज़रत हमजा ने कुफ़्फ़ार ए क़ुरेश से मुख़ातब(संबोधीत) होकर कहा था कि मैं गवाही देता हूँ कि नहीं है कोई माबूद सीवाए अल्लाह के ,मुहम्मद (स.व.) अल्लाह के रसूल हैं इस तरह आप ने अपने ईमान लाने का इज़हार किया और कहा कि अगर तुम में हिम्मत हो तो मुझे रोक कर देख लो और हज़रत हमजा अपने इस्लाम पर क़ायम रहे जब वहां से बारगाह ए रीसालत में हाज़िर होएं तो हुज़ूर अकरम (स.व.) ने ख़ुशनुदी का इज़हार फ़रमाया और उन के दीन पर साबित क़दम रहने की दुआ की।

डाक्टर सय्यद मुहम्मद हमीद उद्दीन शरफ़ी डाइरेक्टर आई हरक ने आज सुबह 9 बजे इवान ताज उलउर्फाअ हमीदाबाद वाक़े शरफ़ी चमन ,सब्ज़ी मंडी और 11 बजे दिन जामा मस्जिद महबूब शाही , मालाकंटा रोड,रूबरू मुअज़्ज़म जाहि मार्किट में इस्लामिक हिस्ट्री रिसर्च कौंसल इंडिया ( आई हरक) के ज़ेर ए एहतिमाम मुनाक़िदा ९७८ वीं तारीख इस्लाम इजलास के अली अलतरतीब पहले सेशन में अहवाल ए अन्बीया (अ.स.) के तहत हज़रत मूसा अलैहि स्सलाम के अहवाल ए मुक़द्दसा और दूसरे सेशन में एक मुहाजिर एक अंसारी सिलसिला के ज़िमन में रसूलू ल्लाह(स.व.) के अम्मे मुहतरम हज़रत हमजा बिन अबदुल्मुत्तलिब के हालात मुबारका पर तोसीई लकचर दीया।

कीराअत‌ कलाम पाक, हमद बारी ताला,नात शहनशाह ए कोनैन स.व. से कार्रवाई का आग़ाज़ हुआ। एक आयते जलीला की तफ़सीर,एक हदीस शरीफ की त‌शरीह और एक फ़िक़ही मसला के तोजीह मुतालाती मवाद की पेशकशी के बाद डाक्टर सैयद‌ मुहम्मद हसीब उद्दीन हमीदी ज्वाइंट डाइरेक्टर आई हरक ने इंग्लिश लकचर सीरीज़ के ज़िमन में हयात ए तय्यीबा के मुक़द्दस मौज़ू पर अपना ७२८ वां सिलसिला वार लकचर दिया।

अह्ले इल्म हज़रात और बाज़ौक़ सामीन की कसीर तादाद मौजूद थी।

डाक्टर हमीद उद्दीन शरफ़ी ने सिलसिला कलाम को जारी रखते होए कहा कि हज़रत हमजा हाशिम बिन अबदे मुनाफ़ के पोते थे रसूलूल्लाहस.व. और हज़रत हमजा का सिलसिला नसब आलीया एक ही है हज़रत हमजा की कुन्नियत अबू याला और अबू अम्मारा मशहूर है।
रसूलूल्लाह स.व.और हज़रत हमजा को हज़रत सुवैबा ने दूध पिलाया था इस तरह हज़रत हमजा ओर हुज़ूर अकरम स.व. के दूध शरीक भाई होने का एज़ाज़ भी रखते थे बलिहाज़ उम्र(उमर में) आप हुज़ूर अक़्दस(स.व.) से दो बरस पहले पैदा होएं थे। उन्हें हिज्रत मदीना मुनव्वरा का इम्तियाज़ भी हासिल हुआ।

अल्हाज मुहम्मद यूसुफ़ हमीदी ने इबतेदा में ख़ैरमक़दम किया और जनाब मुहम्मद मज़हर हमीदी ने आख़िर में शुक्रिया अदा किया।

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