Wednesday , November 22 2017
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रांची के इंतेजार अली के खिलाफ धमाके खेज आलात का अब तक नहीं मिले सुबूत

रांची : वर्द्धमान-हटिया पैसेंजर ट्रेन से धमाके खेज आलात की बरामदगी और मुबाइयना तौर से धमाके खेज आलात लाने के इल्ज़ाम में हिंदपीढ़ी के रहने वाले इंतेजार अली के खिलाफ पुलिस को अब तक कोई सुबूत नहीं मिले हैं।

रांची जीआरपी की पुलिस ने इंतेजार अली को भले ही जेल भेज दिया हो, लेकिन अब उसके खिलाफ सुबूत जुटाने में पुलिस अफसरों के पसीने छूट रहे हैं। पुलिस महकमा के ही सीनियर अफसर दबी जुबान से इस मामले में इंतेजार अली को बेगुनाह मान रहे हैं। वह कहते हैं देखा जाये, तो शुरू से ही मामले में पुलिस ने गलतियां की। ट्रेन में सीट के नीचे से धमाके खेज आलात बरामद होने और इस इल्ज़ाम में सीट पर बैठे सख्श को गिरफ्तार कर लेना बड़ी भूल थी। पुलिस को थोड़ा इंतजार करना चाहिए था, तब पुलिस धमाके खेज आलात से भरा बैग लेकर चल रहे सख्श को पकड़ सकती थी। वैसे भी अदालत में पुलिस यह बात साबित नहीं कर पायेगी कि सीट के नीचे रखा धमाके खेज आलात इंतेजार अली का ही था। दूसरी बड़ी गलती यह की गयी कि मामले को सनसनीखेज बनाने के मक़सद से बिना जांच पड़ताल किये ही आरडीएक्स की बरामदगी की खबर फैला दी गयी। इससे यह पूरा मामला दहशतगर्द तंजीम की तरफ मुड़ गया।

तीसरी बड़ी गलती यह हुई कि हर मामले में दिल्ली को खबर पहुंचाने वाले एक अफसर ने इंतेजार की गिरफ्तारी को भी बड़ी कामयाबी बताते हुए दिल्ली में फोन कर जानकारी दी। इस वजह से अब तक पुलिस मामले में पीछे हटने को तैयार नहीं है। पुलिस तब भी नहीं संभली, जब इंतेजार अली के हिंदपीढ़ी वाकेय घर से ऐसा कुछ भी नहीं मिला, जिससे उसके मुजरिम, नक्सल या दहशतगर्द होने की तसदीक़ हो सके।

अब तक की तहक़ीक़ात में यह सुबूत वाजेह हो गया है कि 18 अगस्त को झालदा में एक एनजीअो की तरफ से मेडिकल कैंप लगाया गया था। उस कैंप में इंतेजार अली भी गया था। मरीजों का इलाज भी किया था। कैंप में जाने के लिए मेडिकल के एक तालिबे इल्म ने इंतेजार को एनजीओ से राब्ता कराया था। अब सवाल उठता है कि अगर इंतेजार अली कैंप में मरीजों की जांच कर रहा था, तो वह धमाके खेज आलात लाने के लिए वर्द्धमान कैसे पहुंचा।

पुलिस ने इंतेजार के मोबाइल का कॉल डिटेल रिपोर्ट (सीडीआर) निकाला था। इसकी जायजा लेने के बाद भी पुलिस को इंतेजार के खिलाफ कोई सुबूत नहीं मिल पाया है। ज़राये के मुताबिक इंतेजार के मोबाइल के सीडीआर से यह पता चला है कि वह मरीजों, रिशतेदारों के मेंबरों से ही बात किया करता था।

 

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