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रांची में आयकर विभाग का सर्वे : जेवर व्यापारियों के पास से 7.5 करोड़ कालेधन का सबूत, टैक्स देने की बात कबुल की

रांची : आयकर सर्वे के दौरान रांची व रामगढ़ के जेवर व्यापारियों के पास साढ़े सात करोड़ के कालेधन होने के सबूत मिले हैं. सोना-चांदी के स्टाॅक में भारी अंतर पाये जाने के बाद इन व्यापारियों ने 4.40 करोड़ के जेवर को अपना ही कालाधन मान लिया है. इस रकम पर टैक्स देने की बात स्वीकार कर ली है. इन व्यापारियों ने 500 व 1000 के नोटों का प्रचलन बंद होने के बाद तीन करोड़ से अधिक बैंकों में जमा कराये हैं. व्यापारियों ने इस राशि को पहले की नकद बिक्री बतायी है. आयकर अधिकारियों ने बैंक में जमा नकद रकम के सिलसिले में अलग से जांच शुरू कर दी है. Â आयकर उप निदेशक अनुसंधान मयंक मिश्रा और उपायुक्त रंजीत मधुकर के नेतृत्व में गुरुवार को शुरू हुआ सर्वे शनिवार शाम को खत्म हो गया.

हीरा-पन्ना ज्वेलर्स नामक प्रतिष्ठान में भी स्टाॅक से अधिक जेवर पाये गये. प्रतिष्ठान के मालिक अजय ने 15 लाख रुपये के जेवरात को अपनी अघोषित संपत्ति मानी और टैक्स देने की बात स्वीकार की. 500-1000 रुपये के नोटों का प्रचलन बंद होने बाद प्रदीप कुमार और हीरा-पन्ना ज्वेलर्स ने मिल कर बैंक में दो करोड़ रुपये से अधिक जमा काराये हैं. इस राशि को पहले की नकद बिक्री बतायी है. नकद बिक्री के दावों को संदेहास्पद मानते हुए आयकर विभाग ने इसके लिए अलग से जांच शुरू की है.

अपर बाजार स्थित अलका व न्यू अलका ज्वेलर्स में स्टाॅक रजिस्टर में सात करोड़ के जेवरात होने की बात दर्ज थी. पर दुकान में 10 करोड़ के जेवरात पाये गये. पूछताछ के बाद प्रतिष्ठान के मालिक शंकर प्रसाद व दिलीप प्रसाद ने 2.5 करोड़ के जेवर को अपनी अघोषित संपत्ति बतायी. इस पर टैक्स देने की बात स्वीकार की. प्रदीप कुमार की रांची स्थित दुकान के स्टाॅक में भारी अंतर पाया गया है. उन्होंने रांची स्थित दुकान में एक करोड़ व रामगढ़ स्थित दुकान में 75 लाख के जेवर के स्टाॅक को अघोषित संपत्ति बतायी.

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