Saturday , April 21 2018

राजद से दोस्ती मंजूर नहीं, तो रास्ता नापें : नीतीश

साबिक़ वजीरे आला नीतीश कुमार ने राजद से दोस्ती पर सवाल उठानेवाले पार्टी एमएलए को दो टूक जवाब दिया है। विधान परिषद अहाते में उन्होंने कहा कि इत्तिहाद पर सवाल उठानेवालों को अपना रास्ता खुद तय कर लेना चाहिए।

साबिक़ वजीरे आला नीतीश कुमार ने राजद से दोस्ती पर सवाल उठानेवाले पार्टी एमएलए को दो टूक जवाब दिया है। विधान परिषद अहाते में उन्होंने कहा कि इत्तिहाद पर सवाल उठानेवालों को अपना रास्ता खुद तय कर लेना चाहिए।

कुछ एमएलए के मुखालिफत पर उन्होंने कहा कि अगर किसी को पार्टी में रहना होगा, तो इस मुद्दे पर पार्टी के फैसले के साथ रहना होगा। पार्टी के फैसले से मुतमइन नहीं होनेवाले एमएलए अपना फैसला लेने के लिए आज़ाद हैं। साबिक़ वजीरे आला ने कहा कि सियासत में कौन क्या करता है, इसे बहुत ज्यादा तवज्जो नहीं दिया जाना चाहिए। किसी सख्श या कुछ लोगों के इस तरह के ख्याल हो सकते हैं, लेकिन इस बारे में पार्टी का जो फैसला होगा, वह हर सख्श पर लागू होगा। मालूम हो कि जदयू एमएलए राजीव रंजन ने हाल ही में नीतीश को खत लिख कर राजद से इत्तिहाद पर दुबारा गौर करने की सलाह दी है। इस पर साबिक वजीरे आला ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है कि उन्होंने क्या कहा है। इसकी वे जानकारी हासिल करेंगे।

भाजपा के खिलाफ वसीह गिरोहबंदी के हक़ में जदयू

साबिक़ वजीरे आला ने कहा कि मुल्क और बिहार की सियासत को देखते हुए इत्तिहाद को लेकर किसी भी क़िस्म की इमकान से इनकार नहीं किया जा सकता है। मुल्क की जो मौजूदा सियासी हालात है, उसे नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता है। नीतीश ने कहा कि जिस तरह बिहार में हाल ही में एसेम्बली जमनी इंतिखाबात के दौरान भाजपा ने जो खेल खेलने की कोशिश की, उसको नाकामयाब करने के लिए सब लोग एक साथ आये। जदयू उम्मीदवारों को राजद, कांग्रेस, भाकपा और कुछ आज़ाद एमएलए ने हिमायत दिया, जिसके बाद भाजपा का ‘गेम प्लान’ नाकामयाब हुआ।

हम सिर्फ दो पार्टियों जदयू और राजद के गोलबंदी की बात नहीं करते हैं, बल्कि जो भी भाजपा से अलग दल हैं, चाहे वाम दल या कांग्रेस हों, सब इस दायरे में आते हैं। इन दलों के दरमियान आपसी समझ की इमकानात दिखती है, लेकिन इस बारे में कोई सख्त बात नहीं हुई है। हमलोग वसीह गोलबंदी के हक़ में हैं, लेकिन हमारे दल के किसी एक सख्श को अगर यह बुरा लगता है, तो उन्होंने अपनी बात कही होगी। इस तरह की गोलबंदी होगी, वह एक सियासी फैसला होगा। फिलहाल इसके लिए कोई बुनियादी बातचीत नहीं हुई है, लेकिन इस तरह की बातचीत की इमकान से कोई इनकार नहीं कर सकता है.

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