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राजनाथ सिंह के पावर में की गई कटौती, विदेशी निवेश की अब सभी फाईले वाणिज्य मंत्रालय के अधीन!

मोदी सरकार ने अब उस नियम में बदलाव कर दिया है जिसके तहत विदेशी निवेश से जुड़े सभी आवेदन पहले गृह मंत्रालय के पास ही आते थे। अभी तक विदेशी निवेश से जुड़े सभी प्रस्ताव पहले गृह मंत्रालय के पास सिक्योरिटी क्लीयरैंस के लिए आते थे लेकिन सरकार ने अब इस पुराने नियम को एक रात में ही बदल डाला है।

अब विदेशी निवेश से जुड़े सभी मामले सिक्योरिटी क्लीयरैंस के लिए केवल वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु के अधीन आने वाले डिपार्टमैंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रोमोशन के पास ही आएंगे।

अब इसके लिए किसी दूसरे मंत्रालय की क्लीयरैंस की जरूरत नहीं होगी लेकिन कंट्री ऑफ कन्सर्न से जुड़े जितने भी मामले सिक्योरिटी क्लीयरैंस के लिए आएंगे उनका निदान संबंधित प्रशासकीय विभाग व मंत्रालय ही करेगा।

इस तरह से अब केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के पर काटने की तैयारी हो रही है। हालांकि पी.एम.ओ. की तरफ से स्पष्टीकरण दिया गया है कि यह बदलाव देश में विदेशी निवेश को आकर्षित करने व ईज ऑफ डूइंग बिजनैस को स्मूथ बनाने के लिए किया गया है।

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