Monday , July 16 2018

राजनितिक कारणों से बॉर्डर के गाँव कराए जा रहे हैं खाली: प्रोफ़ेसर जगरूप सिंह

चंडीगढ़: सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारतीय पंजाब में पाकिस्तानी सीमा से सटे इलाक़ों को ख़ाली कराए जाने के सरकार के फ़ैसले पर सवालिया निशान लग रहे हैं.बीबीसी से खास बात चीत में, गुरु नानक देव विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफ़ेसर जगरूप सिंह शेखों ने सरकार की मंशा पर शक ज़ाहिर किया है. शेखों इसे यूपी और पंजाब में होने वाले चुनावों से जोड़ कर देखते हैं.

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बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान सीमा पर किसी तरह का तनाव नहीं है, कोई डर का माहौल या युद्ध की कोई आशंका भी नहीं है, ऐसे में बड़ी तादाद में गांव ख़ाली कराने की क्या ज़रूरत है, सरकार नहीं बता रही है. राज्य सरकार कहती है कि केंद्र सरकार के निर्देश पर ऐसा किया जा रहा है, पर सवाल यह है कि केंद्र सरकार के इस फ़ैसले पर राज्य सरकार ने क्यों कुछ नहीं पूछा? शेखों का कहना है कि यह चुनाव पूर्व चुनाव की तैयारी की रणनीति के तहत एक तरह का युद्धोन्माद खड़ा किया जा रहा है, राष्ट्रवाद को आक्रामक वातावरण में घोला जा रहा है. यह चुनाव की तैयारी है.
उन्होंने यह भी कहा कि दरअसल केंद्र और राज्य सरकारों की विशवसनीयता पूरी तरह ख़त्म हो चुकी है, उनके पास जनता को बताने के लिए कोई मुद्दा नहीं है. इसलिए वे एक चुनावी मुद्दा खड़ा कर रहे हैं.राजनीति शास्त्र के इस प्रोफ़ेसर का कहना है कि सीमा पर रहने वाले लोग समय से पहले ही स्थिति को भांप लेते हैं और ख़ुद ही इलाक़ा छोड़ देते हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि पूरे इलाक़े में रोज़गार, विकास, दूरसंचार की सुविधाएं, शिक्षा और दूसरी चीज़े मुहैया नहीं हैं. इसकी वजह यह है कि किसी सरकार का इलाक़े के विकास की ओर ध्यान ही नहीं गया.जनता का ध्यान बटाने के लिएयह सब किया जा रहा है.
उनका यह कहना भी है कि 21,000 किसानों की कम से कम 25,000 एकड़ ज़मीन सीमा पर लगे बाड़ की चपेट में आकर बेकार हो चुकी है.कई इलाक़े ऐसे भी हैं जो बारिश के मौसम में पूरे देश से कट जाते हैं. सरकार ने इस पर कुछ नहीं किया और अब चुनाव के पहले एक मुद्दा खड़ा कर के चुनावी लाभ बटोरना चाहती है, जो है ही नहीं.
साल 1965, 1971 और संसद पर हुए हमलों के बाद जो स्थिति बनी थी उस समय भी लोगों ने गांव ख़ीली कर दिए थे. पर यहां तो लोग शांत हैं और सरकार आतंकित है.शेखों ने सीमाई इलाक़ों की बदहाली के लिए आज़ादी के बाद से अब तक की तमाम सरकारों को ज़िम्मेदार ठहराया

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