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राजिस्थान एसेंबली में मुस्लिम नुमाइंदगियों में इज़ाफ़ा का इमकान नहीं

राजिस्थान एक ऐसी रियासत है जहां किसी ज़माने में यानी 1971 ता 1993 एक मुस्लिम वज़ीर-ए-आला बरकतुल्लाह ख़ान ने अपनी ख़िदमात अंजाम दी थीं लेकिन अब ऐसा लगता है कि रियासत की 14 वीं एसेंबली में मुस्लिम एम एल एज़ की तादाद में कोई ख़ातिरख़वाह इज़ाफ़ा नहीं

राजिस्थान एक ऐसी रियासत है जहां किसी ज़माने में यानी 1971 ता 1993 एक मुस्लिम वज़ीर-ए-आला बरकतुल्लाह ख़ान ने अपनी ख़िदमात अंजाम दी थीं लेकिन अब ऐसा लगता है कि रियासत की 14 वीं एसेंबली में मुस्लिम एम एल एज़ की तादाद में कोई ख़ातिरख़वाह इज़ाफ़ा नहीं होगा।

2008 इंतिख़ाबात में 11 मुस्लमान मुंतख़ब हुए थे। यहां के 40 ता 45 एसेंबली हलक़ों में हालाँकि मुस्लिम वोटस फ़ैसलाकुन साबित होते हैं लेकिन कांग्रेस ने 16 मुस्लिम उम्मीदवार और बी जे पी ने 4 मुस्लिम उम्मीदवारों को नामज़द किया है। बी जे पी ने राजिस्थान में मुस्लिम वोटर्स को राग़िब करने की बड़ी कोशिश की और सिवाय माधव पर और सीकर में नरेंद्र मोदी की रैलयों का इनइक़ाद किया था।

1952 में राजिस्थान एसेंबली में पाँच मुस्लमान थे। 1957 में 4 , 1962 में 3, 1967 में 6 , 1972 में 5, 1977 में 9, 1980 में 8, 1985 में 7 , 1990, में 8, 1993 में 4, 1998 में 9 और 2003 में सिर्फ़ 4 मुस्लिम एम एल एज़ थे जिन में हाजी मक़बूल, ज़किया, अमीन ख़ान, ज़ाहिदा ख़ान, नसीम अख़तर, सालिह मुहम्मद और ज़ाकिर हुसैन के नाम काबिल-ए-ज़िकर हैं।

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