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राज्य के अलग झंडे की मांग को शशि थरूर ने किया समर्थन, कहा- ‘संविधान में प्रतिबंध नहीं है’

बेंगलूरु। पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने कहा कि कर्नाटक यदि अपना अलग ध्वज रखता है तो इसमें कुछ गलत नहीं हैं और इससे राष्ट्रीयता को कोई आघात नहीं लगता। किसी भी राज्य के पृथक ध्वज रखने पर संविधान में कोई रोक नहीं हैं।

वे रविवार को यहां जीकेवीके में आयोजित तीन दिवसीय अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के मौके पर संवाददाता सम्मेलन में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज बड़ा होना चाहिए और उसे अधिक ऊंचाई पर फहराया जाना चाहिए।

राज्य ध्वज उससे छोटा होना चाहिए और उसे राष्ट्रीय ध्वज की तुलना में कम ऊंचाई पर फहराया जाना चाहिए। एक ही ध्वज संबंधी भाजपा की दलीलों की तरफ ध्यान दिलाने पर उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पहले से पृथक ध्वज है।

अमरीका में पचास राज्य हैं और सब राज्यों के अपने अपने पृथव ध्वज हैं। वहां किसी तरह की समस्या पैदा नहीं होती है पर यहां समस्या क्यों हैं? हिंदी थोपने के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि देश नेे प्राथमिक शिक्षा में त्रिभाषा सूत्र को स्वीकार किया है लेकिन केंद्र सरकार इस कार्यक्रम के लिए अधिक कुछ कर नहीं रही है।

चूंकि यह एक संवेदनशील मसला है लिहाजा केंद्र सरकार को शिक्षा में भाषा के मसले को राज्यों पर छोड़ देना चाहिए। किसी भी स्थिति में हम देश में संचार के लिए अंग्रेजी का उपयोग कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वे स्कूलों में कन्नड़ सिखाने के लिए कानून लाने के राज्य सरकार के कदम की सराहना करते हैं।

उन्होंने कहा कि राज्यों में हिंदी सिखाने के लिए केंद्र सरकार को वरीयता देनी चाहिए। दक्षिण के राज्यों में भी हिंदी सिखाने के लिए बढ़ावा दिया जाना चाहिए क्योंकि यहां पर पहले से द्विभाषा सूत्र अस्तित्व में है। मातृ भाषा में शिक्षा देने का मसला राज्यों पर छोड़ा जाना चाहिए।

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