Wednesday , December 13 2017

राज्य सभा में लोकपाल बिल

लोकपाल बिल जिसमें पहले ही काफ़ी ताख़ीर होचुकी है, आज ग़ौर के लिए राज्य सभा में पेश किया गया। सिवाए समाजवादी पार्टी के बेशतर सियासी पार्टियों ने मुख़ालिफ़ बदउनवानी क़ानूनसाज़ी की ताईद करने से इत्तिफ़ाक़ किया है। समाजवादी पार्टी ने एव

लोकपाल बिल जिसमें पहले ही काफ़ी ताख़ीर होचुकी है, आज ग़ौर के लिए राज्य सभा में पेश किया गया। सिवाए समाजवादी पार्टी के बेशतर सियासी पार्टियों ने मुख़ालिफ़ बदउनवानी क़ानूनसाज़ी की ताईद करने से इत्तिफ़ाक़ किया है। समाजवादी पार्टी ने एवान की कार्यवाही का बाईकॉट करते हुए वाक आउट किया। क़ानून के मुसव्वदा पर बहस का आग़ाज़ करते हुए मर्कज़ी वज़ीर-ए-क़ानून कपिल सिब्बल ने कहा कि ये एक तारीख़ी दिन है। ये जश्न मनाने का मौक़ा है इस लिए कि इस मसले पर इत्तेफ़ाक़ राय पैदा होचुका है।

लोकपाल और लोकायुक्त बिल 2011 जो दिसम्बर 2011 में एवान में मंज़ूर नहीं किया जा सका था, पारलिमानी सलेक्ट कमेटी से उसकी सिफ़ारिशात हासिल करने के लिए रुजू किया गया था। कमेटी ने कई तरमीमात की सिफ़ारिश की ताकि उसे तमाम सियासी पार्टियों के लिए काबिल-ए-क़बूल बनाया जा सके। ये क़ानून बेशतर पार्टियों की जानिब से मंज़ूर किए जाने के लिए तैयार है। अहम अपोज़िशन बी जे पी, बाएं बाज़ू और बी एस पी ने इस इक़दाम की ताईद ज़ाहिर की है।

कपिल सिब्बल ने नए इक़दाम के बारे में किसी भी अंदेशे का अज़ाला करने के लिए कहा कि तहक़ीक़ात में हुकूमत की दख़ल अंदाज़ी का कोई आंसर इस क़ानून में नहीं पाया जाता। बदउनवानी के ख़िलाफ़ तहक़ीक़ात लोकपाल के तहत होंगी। क़ाइद अपोज़िशन अरूण जेटली ने बिल की ताईद करते हुए कहा कि उन्हें ख़ुशी है कि हुकूमत ने तबदिल माहौल में तमाम तरमीमात क़बूल कर ली हैं।

उन्होंने अपने बयान की वज़ाहत नहीं की लेकिन ग़ालिबन वो हालिया असेम्बली इंतेख़ाबात बराए दिल्ली में आम आदमी पार्टी के हाथों लोकपाल के मसले पर कांग्रेस की नाकामी का हवाला दे रहे थे। कपिल सिब्बल ने 29 दिसम्बर 2011को इस बिल की मंज़ूरी से क़ासिर रहने का हवाला देते हुए कहा कि उसकी ख़ालिस टेक्नीकल वजूहात थीं हालाँकि इजलास आधी रात तक जारी रहा था लेकिन सदर नशीन ने बादअज़ां उसे ग़ैर मुअय्यना मुद्दत के लिए मुल्तवी कर दिया था।

समाजवादी पार्टी के बाईकॉट पर तबसरा करते हुए अरूण जेटली ने कहा कि फ़ैसला साज़ी के अमल को रोकना और इस क़ानून की मंज़ूरी में रुकावट पैदा करना दुरुस्त नहीं है, इस से सूरत-ए-हाल बेहतर होगी और अवाम को ग़लत वजूहात की बिना पर फ़ैसले करने से ख़ौफ़ होगा।बी एस पी के सतीश चन्द्र मिश्रा ने इज़हार-ए-अफ़सोस किया कि हुकूमत ने उनकी पार्टी को कल मुनाक़िदा कुल जमाती इजलास की इत्तिला नहीं दी थी, उन्हें ज़राए इबलाग़ के ज़रीया समाजवादी पार्टी और बी एस पी दोनों के इजलास का बाईकॉट करने की ख़बर मिली इस से अवाम को ग़लत पैग़ाम पहुंचा।

उन्होंने कहा कि बी एस पी क़ानूनसाज़ी की इब्तिदा-ए-ही से ताईद कररही है। सी पी आई ( एम ) के सीता राम यचोरी ने क़ानूनसाज़ी की ताईद करते हुए हुकूमत से मुतालिबा किया कि हुकूमत को ख़ानगी कंपनीयों जैसे कॉर्पोरेट्स और फ़लाही तंज़ीमों को भी ग़ैर मुल्की एन जी औज़ के साथ इस क़ानून के दायराकार में शामिल करना चाहिए। फ़लाही तंज़ीमों को दायरा कार से बाहर रखने के बारे में उन्हों ने कहा कि उन्हें भी लोक पाल के तहत होना चाहिए।

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