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राज कपूर आइटम सांग के बानी थे : जितेंद्र

मुंबई, 07 दिसम्बर: (एजेंसी) आजकल हिन्दी फिल्मों की कामयाबी में आइटम सांग को भी एहमीयत का हामिल क़रार दिया जा रहा है जबकि क़ब्लअज़ीं कैबरे डांस की शमूलीयत ज़रूरी हुआ करती थी। अपने वक़्त के मशहूर हीरो और जंपिंग जैक कहलाये जाने वाले जितेंद

मुंबई, 07 दिसम्बर: (एजेंसी) आजकल हिन्दी फिल्मों की कामयाबी में आइटम सांग को भी एहमीयत का हामिल क़रार दिया जा रहा है जबकि क़ब्लअज़ीं कैबरे डांस की शमूलीयत ज़रूरी हुआ करती थी। अपने वक़्त के मशहूर हीरो और जंपिंग जैक कहलाये जाने वाले जितेंद्र ने बताया कि पहले फिल्मों में हेलन जी का डांस ज़रूर रखा जाता था और वो भी कुछ इस तरह से कि वो फ़िल्म की कहानी का हिस्सा ही मालूम होता था।

इन गानों को आइटम सांग का दर्जा अब दिया गया है जबकि ये चलन बाली वुड में एक अर्सा से मौजूद है। मैं आँजहानी राजकपूर साहब को आइटम सांग का बानी कहूं तो बेजा ना होगा। जिन लोगों ने भी उनकी 1964 की हिट फ़िल्म संगम देखी है, इसमें विजयंती माला जी का गाना मैं क्या करूं राम मुझे बूढ्ढा मिल गया ज़रूर याद होगा।

वो दरअसल आइटम सांग के ज़ुमरे में ही आता है जहां वो अपने शौहर यानी फ़िल्म के हीरो राज साहब को लुभाने के लिए मुख़्तलिफ़ रूप लेकर उनके सामने मुख़्तलिफ़ अंदाज़ के रक़्स पेश करती हैं। कहानी के मुताबिक़ उन्हें राज कपूर को मुश्तइल करना होता है लिहाज़ा वो उन्हें बूढ्ढा कह कर गाना शुरू कर देती हैं।

आइटम सांग होने के बावजूद वो गाना फ़िल्म का हिस्सा लगता था लेकिन आजकल ऐसा नहीं है। फ़िल्म की कहानी से थोड़ी देर के लिए फ़रार हासिल करते हुए शायक़ीन को किसी मशहूर हीरोइन का आइटम सांग दिखाया जाता है जिसके लिए लाखों और करोड़ों रुपये ख़र्च होते हैं।

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