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राबर्ट वडेरा की तहक़ीक़ात करने वाले आफीसर का तबादला

चन्दीगढ़, १७ अक्टूबर ( पी टी आई) सदर ( अध्यक्ष) कांग्रेस सोनीया गांधी के दामाद राबर्ट वडेरा की मुबय्यना ( कथित) इमलाक ( प्रापर्टी) का कम तख़मीना (अनुमान) लगाए जाने की तहक़ीक़ात करने वाले आई ए एस ऑफीसर उस वक़्त तवज्जा का मर्कज़ बन गए जब अचा

चन्दीगढ़, १७ अक्टूबर ( पी टी आई) सदर ( अध्यक्ष) कांग्रेस सोनीया गांधी के दामाद राबर्ट वडेरा की मुबय्यना ( कथित) इमलाक ( प्रापर्टी) का कम तख़मीना (अनुमान) लगाए जाने की तहक़ीक़ात करने वाले आई ए एस ऑफीसर उस वक़्त तवज्जा का मर्कज़ बन गए जब अचानक उन का तबादला कर दिया गया ।

याद रहे कि मौसूफ़ लैंड कनसोलीडेशन ऐंड लैंड रिकार्ड । कम । इन्सपेक्टर जनरल आफ़ रजिस्ट्रेशन के ओहदा पर फ़ाइज़ (नियुक्त) थे और कल अपनी डयूटी अंजाम देने के आख़िरी रोज़ उन्होंने मानेसर। शिकवा पुर में राबर्ट वडेरा की जानिब से फ़रोख्त की गई 3 एकड़ अराज़ी ( जमीन) से मुताल्लिक़ ( संबंधित) भी अहकामात जारी किए ।

राबर्ट वडेरा ने मज़कूरा ( उक़्त) अराज़ी DLF को फ़रोख्त की थी । मिस्टर खेमका जू 1991 बैच के ऑफीसर हैं ने अपने तबादला पर शदीद ( शख्त) रद्द-ए-अमल ( प्रतिक्रिया) ज़ाहिर करते हुए इस फ़ैसला को ग़ैर इंसानी ( अमानवीय) और हौसलाशिकन (निराशाजनक) क़रार दिया ।

उन्होंने कहा कि अगर इन मसाइल ( सम्स्याओं) को उजागर करते हुए मंज़रे आम पर (सबके सामने) लाया गया है तो फिर उन के फ़ैसले को मामूल के मुताबिक़ फ़ैसला तसव्वुर किया जाना चाहीए लेकिन यहां अलमीया ( दु:ख् की बात) ये है कि आप के अंदर का इंसान कुछ और फ़ैसला करता है और इस के मुताबिक़ आप अपने फ़ैसले करते हैं ।

कुछ कार्यवाहीयां ऐसी होती हैं जिन्हें लोग सख़्त कहते हैं लेकिन मेरे लिए वो कार्यवाहीयां बिलकुल मुनासिब हैं । इस तरह से तबादला कर देना इंतिहाई शर्मनाक और हौसलाशिकन है । इससे तो ये ज़ाहिर होता है कि हमारे सिस्टम में कहीं ना कहीं कोई ना कोई ख़राबी है ।

मिस्टर खेमका ने कहा कि ज़िंदगी के बारे में इनका तजुर्बा बहुत तवील और तल्ख़ है । अब तक मैंने स्कूल और कालेज में अपनी पढ़ाई के दौरान बदी पर नेकी की फ़तह की कहानियां पढ़ी हैं । हक़ीक़ीत में ऐसा होता है ये मुझे नहीं मालूम लेकिन मेरा तबादला कर के कोई नेक काम नहीं किया गया है बल्कि इसके ज़रीया मेरी हौसलाशिकनी की ( हिम्मत तोड़ी) गई है । इस तरह की हरकतों के ज़रीया इंसान को सच्चाई के रास्ते से भटकाया जाता है ।

में कोई महात्मा नहीं कि इस किस्म के ब्यानात दूं लेकिन तबादला से एक बात की तौसीक़ ( साफ/ सिद्व) हो गई कि कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ गड़बड़ ज़रूर है ।

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