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रामजादों और हरामजादों के बीच फंसी मोदी सरकार

(हिसाम सिद्दीकी) मुल्क के आईन, हिन्दुस्तान के कल्चर और समाजी तहजीब से नावाकिफ लोगों को पार्लियामेंट में पहुंचाने और फिर वजीर बनाने के नतीजे में नरेन्द्र मोदी की सरकार रामजादों और हरामजादों के दरमियान फंस गई है। रामजादों में तो प

(हिसाम सिद्दीकी) मुल्क के आईन, हिन्दुस्तान के कल्चर और समाजी तहजीब से नावाकिफ लोगों को पार्लियामेंट में पहुंचाने और फिर वजीर बनाने के नतीजे में नरेन्द्र मोदी की सरकार रामजादों और हरामजादों के दरमियान फंस गई है। रामजादों में तो पूरा मुल्क खुद को शामिल समझता है।

जिस किस्म की ज़ुबान खुद को साध्वी कहने वाली निरंजन ज्योति ने इस्तेमाल की है वह ज़ुबान रामजादों की नहीं हरामजादों की ही हो सकती है। इसलिए पहले तो यही तय हो जाना चाहिए कि खुद निरंजन ज्योति किस तबके से ताल्लुक रखती हैं। वह कुछ भी हों किसी भी तबके से ताल्लुक रखती हो इतना तो तय हो गया कि नरेन्द्र मोदी सरकार इस बयानबाजी में पूरी तरह फंस गई है।

खबर लिखे जाने तक राज्य सभा में वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी की सफाई के बावजूद एवान की कार्रवाई नहीं चल सकी थी। लोकसभा में काफी हंगामा हुआ था तभी निरंजन ज्योति ने माफी जैसा बयान पढ़कर हंगामे को खत्म कराने की कोशिश की थी। लेकिन अपोजीशन पार्टियां उनके बयान से मुतमईन नहीं हुई और कार्रवाई के बायकाट का एलान कर दिया।

पूरे मुल्क में ही नहीं दुनिया भर में इस बयान के लिए मोदी सरकार की थू-थू हो रही है। निरंजन ज्योति ने कहा था कि इस मुल्क में जितने भी लोग रहते हैं वह राम की औलादे हैं बाकी जो ईसाई और मुसलमान खुद को राम की औलाद नहीं मानते वह ‘‘कनवर्टेड’’ हैं।

इसी के साथ अगले जुमले में उन्होंने कहा कि दिल्ली वालों आपको फैसला करना है कि दिल्ली में अगली सरकार रामजादो की बने या हरामजादों की। जाहिर है उन्होंने साफतौर पर ईसाइयों और मुसलमानों को ही यह गंदी गाली दी है। उन्होंने जुर्म किया है देश के बीस करोड़ लोगों के खिलाफ इसलिए सिर्फ पार्लियामेंट में माफी मांग लेने से ही उन्हें माफ नहीं किया जा सकता।

उनको वजारत से बाहर करके उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कराए जाने का मतालबा बिल्कुल दुरूस्त है। राज्य सभा में सीपीएम लीडर सीताराम येचुरी ने बिल्कुल ठीक कहा है कि निरंजन ज्योति ने माफी मांगी या मांगी मांगने का ड्रामा किया। इसका मतलब है कि उन्होंने अपना गुनाह कुबूल कर लिया है।

इसी बुनियाद पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई बनती है। निरंजन ज्योति के इस गुनाह पर भारतीय जनता पार्टी ने पार्लियामेंट के अंदर और टीवी चैनलों की बहस में जिस तरह उनका बचाव करने की भोंड़ी कोशिश की उसी से साबित होता है कि फिरकापरस्ती फैला कर दिल्ली, झारखण्ड और जम्मू रीजन में एलक्शन जीतने की एक बाकायदा तयशुदा साजिश के तहत उन्होंने इस किस्म की बयानबाजी की है। वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने भी घुमा फिरा कर अल्फाज की जादूगरी के जरिए उन्हें बचाने की ही कोशिश की है।

इससे पहले लोकसभा में जब यह मामला उठा था तो बीजेपी ने उन्हीं की हिमायत की थी। जब पार्लियामेंट्री मामलात के वजीर वेंकया नायडू ने महसूस कर लिया कि अब सरकार इस मामले में फंसती ही जा रही है तो उन्होंने शायद अपनी ही लिखी हुई चन्द सतरें निरंजन ज्योति से पढ़वा कर कह दिया कि उन्होंने माफी मांग ली है। निरंजन ज्योति ने घुमा फिरा कर अपने बयान पर पर्दा डालने की कोशिश की उन्होंने साफ तरीके से माफी नहीं मांगी।

सीपीएम लीडर सीताराम येचुरी ने राज्य सभा में कहा है कि निरंजन ज्योति ने मुल्क में रहने वाले दो बड़े तबकों को गाली देकर मुल्क के कानून की नजर में जुर्म किया है। वह अपने जुर्म को कुबूल भी करती है इसीलिए उन्होंने माफी मांगी है। अब उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई किए जाने के अलावा दूसरा कोई रास्ता ही नहीं बचा है।

उनकी इस दलील से मुल्क के तकरीबन तेइस करोड़ मुसलमान और ईसाई तो इत्तेफाक रखते ही है, सौ करोड़ हिन्दुओं की अक्सरियत भी निरंजन ज्योति को मुजरिम तस्लीम करके उन्हें सजा दिए जाने के हक में है। इसके बावजूद वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी, उनकी पूरी सरकार और पार्टी अगर निरंजन ज्योति को बचाने में लगी है तो इसका क्या मतलब है? जिस तरह उन्हें बचाने की कोशिश में राज्य सभा में मोदी के एक और वजीर मुख्तार अब्बास नकवी ने हठद्दर्मी का सबूत दिया उसकी भी मजम्मत होनी चाहिए।

जिस वक्त निरंजन ज्योति ने बीजेपी की पब्लिक मीटिंग में रामजादों और हरामजादों का राग छेड़ा था उस वक्त उनके साथ डायस पर मौजूद जो लोग तालियां बजा रहे थे उनको भी निरंजन ज्योति के साथ मुल्जिम बनाया जाना चाहिए। वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने बार-बार सबका साथ सबकी तरक्की जैसा नारा लगाया है। वजीर-ए-आजम की हैसियत से लालकिले की फसील से अपनी पहली तकरीर में उन्होंने कहा कि कम से कम दस सालों तक हमें किसी भी तरह फिरकावाराना कशीदगी से दूर रहना चाहिए।

उनकी तकरीर और नारों के बावजूद उनकी पार्टी के कुछ गैर जिम्मेदार और बदजुबान लोग समाज में जहर घोलने वाली बयानबाजी करते रहते हैं और इस किस्म की मुजरिमाना बयानबाजी करने वालों के खिलाफ वह कोई कार्रवाई भी नहीं करते। इससे यहीं अंदाजा लगता है कि निरंजन ज्योति हो, आदित्यनाथ हो या उन्हीं जैसे दीगर बीजेपी लीडरान यह लोग बाकायदा एक सोंची समझी साजिश और हिकमते अमली (रणनीति) के तहत इस किस्म की हरकतें और बयान बाजियां करते रहते हैं।

वह अपने बयानात से अपने लोगों में जो मैसेज देना चाहते हैं वह तो चला ही जाता है। बाद में उस पर लीपापोती की जाती है।
इस किस्म की जहरीली बयानबाजी पर भारतीय जनता पार्टी और वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी की अस्ल मंशा उस वक्त सामने आ गई जब राज्य सभा का एजलास चलाए जाने पर गौर करने के लिए ऐवान की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में चार दिसम्बर को सीताराम येचुरी ने तजवीज रखी कि अपोजीशन की जानिब से निरंजन ज्योति या किसी का नाम लिखे बगैर एक मजम्मती तजवीज (निंदा प्रस्ताव) पास कर दिया जाए तो ऐवान की कार्रवाई चलने का रास्ता साफ हो सकता है।

इस पर भारतीय जनता पार्टी की जानिब से सख्त एतराज करते हुए कहा गया कि अगर इस किस्म की तजवीज लाई जाएगी तो उस में 1952 से अब तक बदजुबानी के जितने भी मामलात पेश आए हैं उनका जिक्र होना चाहिए। खुसूसन सोनिया गांधी के उस जुम्ले को शामिल किया जाना चाहिए जिसमें उन्होंने नरेन्द्र मोदी के लिए मौत का सौदागर लफ्ज का इस्तेमाल किया था।

इस जिद की वजह से बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला। वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने राज्य सभा में तमाम पार्टियों से अपील की कि वह ऐवान की कार्रवाई चलने दें, लेकिन कार्रवाई तो चल ही नहीं सकी लोकसभा की कार्रवाई का अपोजीशन ने बायकाट किया।

खबर लिखे जाने तक अपोजीशन पार्टियों ने तय किया था कि तमाम अपोजीशन मेम्बर अगले दिन से स्याह पट्टियां बांध कर पार्लियामेंट में आएंगे और पार्लियामेंट के अहाते में लगे महात्मा गांधी के मुजस्सिमें के पास द्दरना देंगे। दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी में भी घबराहट का माहौल देखा गया।

निरंजन ज्योति की एक पब्लिक मीटिंग चार दिसम्बर को होनी थी आखिरी वक्त में यह मीटिंग रद्द कर दी गई। पता चला है कि खुफिया रिपोर्ट ऐसी थी कि अगर निरंजन ज्योति पब्लिक मीटिंग में तकरीर करेगी तो हंगामा और पथराव भी हो सकता है। इसीलिए उनकी मीटिंग आखिरी वक्त में रद्द कर दी गई।

—————-बशुक्रिया: जदीद मरकज़

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