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रामनता पूर मैं मस्जिद मेराज और मदरसा की तामीर में शरपसंदों की रखना अंदाज़ी

नुमाइंदा ख़ुसूसी-मुस्लमानों का हमदरद होने का वैसे तो कई जमाअतें दम भर्ती हैं लेकिन जब मुल्क के सब से बड़े अकलियती तबक़ा को उन के समाजी और मज़हबी हुक़ूक़ की फ़राहमी की बात आती है तो ये तमाम जमाअतें मस्लहत पसंद होजाती हैं । दरअसल द

नुमाइंदा ख़ुसूसी-मुस्लमानों का हमदरद होने का वैसे तो कई जमाअतें दम भर्ती हैं लेकिन जब मुल्क के सब से बड़े अकलियती तबक़ा को उन के समाजी और मज़हबी हुक़ूक़ की फ़राहमी की बात आती है तो ये तमाम जमाअतें मस्लहत पसंद होजाती हैं । दरअसल दुनिया भर में जम्हूरियत और मज़हबी रवादारी की मिसाल की हैसियत से मक़बूल हमारे मुल्क में तास्सुब पसंदी के मुज़ाहिरे का अंदाज़ा ज़रा मुख़्तलिफ़ है । मुस्लमानों से ग़रज़ निकलनी हो तो सयासी जमाअतें सैकूलर और हमदरद होने का दिखावा करने में पेश पेश रहती हैं लेकिन जब मुस्लमानों को उन के हुक़ूक़ से महरूम रखना हो तो फिर पसेपर्दा अपना सयासी खेल खेलने लगती हैं । इन्साफ़ रसानी का निज़ाम भी शरपसंदों की ताक़त के आगे बेबस नज़र आता है ।

पहले तो मुस्लमानों को इंसाफ़ बड़ी ही मुश्किल से मिलता है लेकिन जब शरपसंद तनज़ीमें यह अनासिर मुस्लमानों को उन के हुक़ूक़ से महरूम रखने की ठान लें तो फिर क़ानून भी बेअसर होजाता है । मुस्लमानों के हक़ में कोई फैसला हो भी जाय तो अदालती अहकामात को ख़ातिर में लाए बगैर तास्सुब पसंदी का खुले आम मुज़ाहरा किया जाता है । इस की एक मिसाल रामनता पूर का वेंकट रेड्डी नगर इलाक़ा है जहां मस्जिद मेराज और मदरसा की तामीर मुक़ामी शरपसंद अफ़राद की वजह से बिलावजह एक अर्सा से तनाज़ा का शिकार बनी हुई है । बताया जाता है कि साल 1984 -ए-में मुक़ामी सरपंच ने वेंकट रेड्डी नगर इलाक़ा में 178 मुरब्बा गज़ ज़मीन पर मस्जिद की तामीर की इजाज़त देते हुए अराज़ी के नोट्री दस्तावेज़ात मुक़ामी मुस्लमानों को हवाले कर दीए थे ।

इस अराज़ी का सर्वे नंबर 200 , 201 और 202 है । बाद अज़ां मस्जिद की अराज़ी पर मस्जिद मेराज-ओ-मदरसा का बोर्ड आवेज़ां कर दिया गया । इस अराज़ी को 17 दिसंबर 1997 को वक़्फ़ गज़्ट में भी शामिल करवा दिया गया जिस की तफ़सीलात हसब ज़ैल है: सक्शन 36 वक़्फ़ एक्ट Gol.5, 1995 , सफ़ा नंबर 120 , Sl.no.48 फाईल नंबर 70/B2/IND/RR/96 बराए ए पी एस्टेट वक़्फ़ बोर्ड है । वक़्फ़ गज़्ट में अराज़ी की तफ़सीलात के इंदिराज के बाद बाज़ाबता मस्जिद कमेटी की तशकील अमल में लाई गई । नसीर उद्दीन को सदर और मंसूर अली को सिक्रेटरी मुंतख़ब किया गया । उन के इलावा ख़्वाजा मियां , जमाल अलुद्दीन , मुहम्मद अबदुल वहाब को बतौर अराकीन शामिल किया गया ।

ताहम मुक़ामी अक्सरीयतीतबक़ा के अफ़राद की तंज़ीम वेंकट रेड्डी नगर डेवलपमनट सोसाइटी इस अराज़ी पर मस्जिद की तामीर की शदीद मुख़ालिफ़त कररही है बल्कि वो किसी सूरत मस्जिद की तामीर को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर असर-ओ-रसूख़ का इस्तिमाल कररही है । बताया जाता है कि सोसाइटी का एक रुकन महिकमा पोलीस से वाबस्ता है और मस्जिद तामीर को रुकवाने में पेश पेश है । इस के अलावा बलदी ओहदेदार भी सोसाइटी का साथ दे रहे हैं बल्कि मस्जिद की तामीर को रुकवाने के लिए बलदिया और सोसाइटी फ़रीक़ के तौर पर अदालत से रुजू हुए हैं जब कि इन के पास उस की कोई बुनियादी वजह ही नहीं है । ये मसला ट्रब्यूनल में पहुंचने के साथ ही ख़ारिज कर दिया गया ।

बताया जाता है कि ट्रब्यूनल में मुक़द्दमा दर्ज किए जाने पर अदालत ने मस्जिद की अराज़ी का सर्वे करवाया । तमाम दस्तावेज़ात की जांच करवाई गई और 3 फरवरी 2007 को वुकला की जानिब से इस अराज़ी का मुआइना भी करवाया गया । तमाम ज़ावियों से मुआमला की तहकीकात के बाद अदालत ने मुक़द्दमा ख़ारिज करते हुए मस्जिद की तामीर की इजाज़त दे दी । इस के बावजूद बलदिया , पोलीस और सोसाइटी के अरकान इस ज़िद पर अड़े हुए हैं कि यहां किसी सूरत मस्जिद तामीर होने नहीं देंगे । बताया जाता है कि मुक़ामी कारपोरेटर , रुकन असेंबली और रुकन पार्ल्यमंट का बरसर-ए-इक्तदार जमात से ताल्लुक़ है और उन तमाम की वेंकट रेड्डी नगर डेवलपमनट सोसाइटी के अरकान को भरपूर हिमायत और पुश्तपनाही हासिल है जिस की वजह से सोसाइटी के अरकान मस्जिद की तामीर को तनाज़ा और तात्तुल का शिकार बनाए हुए हैं । कमेटी के अरकान ने बताया कि अक़लियत दोस्त होने का दम भरने वाली बरसर-ए-इक्तदार जमात मस्जिद की तामीर में बेला वजह रुकावट पैदा करने वाले शरपसंदों का साथ दे रही है ।

कमेटी के अरकान ने ये भी बताया कि चंद दिन क़बल अस्सिटैंट कमिशनर पोलीस राधा कृष्णा ने उन्हें तलब किया और तजवीज़ पेश की कि वो मस्जिद की अराज़ी पर पोलीस आउट पोस्ट बनाना चाहते हैं । उन्हों ने कमेटी के अरकान से कहा कि किसी और मुक़ाम पर सरकारी अराज़ी की निशानदेही की जाय तो वो इस अराज़ी को मस्जिद की तामीर के लिए मुख़तस करवाने की कोशिश करेंगे । साथ ही साथ ए सी पी ने ये भी कहा कि वो सरकारी अराज़ी फ़राहम करवाने की सिर्फ कोशिश करेंगे जब कि ये बात उन के दायरा इख़तियार में नहीं है । क़ारईन ! वेंकट रेड्डी नगर में 200 मुस्लिम ख़ानदान आबाद हैं जिन के लिए इलाक़ा में एक मस्जिद भी मौजूद नहीं है ।

बताया जाता है कि तेलगू देशम दौर-ए-हकूमत में इस मस्जिद की हिसारबंदी के लिए 25 हज़ार रुपय वक़्फ़ बोर्ड ग्रांट भी जारी की गई थी । गौरतलब बात तो ये भी है कि साल 1960 के तमाम दस्तावेज़ात में रामनता पूर दरअसल रहमत पूरा के नाम से दर्ज है । अब ये नाम रहमत पूरा से रामनता पूर कैसे पड़ा ये तो मुक़ामी लोग ही बेहतर जानते हैं । क़ारईन ! जब हम सूरत-ए-हाल को जानने वेंकट रेड्डी नगर पहुंचे तो देखा कि मस्जिद की अराज़ी पर पोलीस का सख़्त पहरा लगा हुआ है । हमें देखते ही पोलीस अहलकार हमारे करीब आए और वहां से फ़ौरी चले जाने को कहा । हमें 5 मिनट भी यहां टहरने का मौक़ा नहीं दिया गया ।

बाअज़ अहलकारों ने बताया कि आप चाहे जो भी हो लेकिन यहां से फ़ौरी चले जाएं क्यों कि आप को देख कर दूसरे फ़िर्क़ा के लोग जमा होंगे जिस से हालात बिगड़ सकते हैं । बताया जाता है कि हाल ही में मीलाद उन्नबी(सलव.) के मौक़ा पर इलाक़ा को पोलीस छावनी में तब्दील कर दिया गया था ताकि मुक़ामी मुस्लमानों को मस्जिद की अराज़ी पर नमाज़ की अदाएगी से बाज़ रखा जा सके । क़ारईन ! मस्जिद से मुत्तसिल अराज़ी पर 1997 मैं गैर मजाज़ तरीका से मंदिर तामीर करदी गई लेकिन कोई हुक्काम से बाज़पुर्स करने वाला नहीं है । बहरहाल शरपसंद अनासिर बिला वजह मस्जिद की तामीर में रखना अंदाज़ी कररहे हैं जब कि अदालत ने भी मस्जिद की तामीर की इजाज़त दे दी है ।।

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