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राम जेठमलानी अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी के अक़िलीयती मौक़िफ़ के हामी

अलीगढ़: सीनियर वकील राम जेठमलानी ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी के अक़िलीयती मौक़िफ़ को बरक़रार रखने के लिए क़ानूनी लड़ाई में अपनी ख़िदमात अंजाम देने की पेशकश की। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी के अक़िलीयती मौक़िफ़ को बहाल किया जाना चाहिए।

ये केस सुप्रीमकोर्ट में चल रहा है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी के सीनियर ओहदेदार ने कहा कि मुमताज़ क़ानूनदां राम जेठमलानी इस यूनीवर्सिटी के वक़ार और मौक़िफ़ को महफ़ूज़ करने के लिए अपनी ख़िदमात की पेशकश की है। राम जेठमलानी के इस जज़बे का ख़ैर‌मक़दम करते हुए अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी के वाइस चांसलर शफ़ी क़दवाई के मीडिया मुशीर ने कहा कि राम जेठमलानी साबिक़ में भी तमाम मसाइल पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी से वाबस्ता थे और इस के अक़िलीयती मौक़िफ़ को बहाल करने के लिए क़ानूनी लड़ाई से मरबूत तमाम मसाइल से वाक़िफ़ हैं।

इस यूनीवर्सिटी के केस की 4 अप्रैल को समाअत मुक़र्रर है। इस केस की पैरवी सीनियर ऐडवोकेट हरीश साल्वे कर रहे हैं। अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी को एक अक़िलीयती इदारे तस्लीम करने से मुताल्लिक़ समीनार मुनाक़िद किया गया है जो नई दिल्ली में 27 फ़रव‌री को इंडियन ला इंस्टीटियूट में मुनाक़िद होगा।

इस समीनार को एनजीओ और वाइस आफ़ हियूमीनिटी की जानिब से मुनाक़िद किया जा रहा है। आर्गेनाईज़रस की जानिब से जारी करदा बयान के मुताबिक़ इस समीनार सदारत साबिक़ चीफ़ जस्टिस ए ऐम अहमदी करेंगे जबकि मुमताज़ क़ानूनदां राम जेठमलानी मेहमान-ए-ख़ोसूसी होंगे|

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