राम मंदिर पर अदालत से कोई उम्मीद नहीं- शिवसेना

राम मंदिर पर अदालत से कोई उम्मीद नहीं- शिवसेना
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अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद की विवादित जमीन पर सुनवाई टलने के बाद मोदी सरकार पर दबाव बढ़ना शुरू हो गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) और शिवसेना ने इस मामले में कूदते हुए सरकार से कानून बनाने की मांग की।

संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में यह स्वीकार किया था कि उपरोक्त स्थान रामलाल का जन्म स्थान है।

तथ्य और प्राप्त साक्ष्यों से भी यह सिद्ध हो चुका है कि मंदिर तोड़कर ही वहां कोई ढांचा बनाने का प्रयास किया गया और पूर्व में वहां मंदिर ही था। संघ का मत है कि जन्मभूमि पर भव्य मन्दिर शीघ्र बनना चाहिए और जन्म स्थान पर मन्दिर निर्माण के लिये भूमि मिलनी चाहिए।

उन्होंने मांग की कि उच्चतम न्यायालय शीघ्र निर्णय करे और अगर कुछ कठिनाई हो तो सरकार कानून बनाकर मन्दिर निर्माण के मार्ग की सभी बाधाओं को दूर कर श्रीराम जन्मभूमि न्यास को भूमि सौंपे।

विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि यह मामला 68 साल से अदालत में लंबित है। हमको उम्मीद थी कि उच्चतम न्यायालय में इस मामले पर सुनवाई आरंभ हो जाएगी लेकिन आज सुनवाई को लंबा लटकाये जाने से लगता है कि अदालत ने लोक महत्व के प्रश्न को नजरअंदाज करके कर्तव्य की अवहेलना की है।

इसे देखते हुए हम अनंतकाल तक प्रतीक्षा नहीं कर सकते हैं इसलिए हम सरकार से आग्रह करते हैं कि वह संसद के शीतकालीन सत्र में विधेयक लाये और कानून बनाकर वर्ष 2018 के अंतिम सूर्यास्त के पहले ही भव्य राममंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करे।

उन्होंने कहा कि सरकार को बहुत सावधानी से चाक चौबंद विधेयक तैयार करना चाहिए और अदालत में चुनौती दिये जाने की दशा में मजबूती से पैरवी की तैयारी भी रखनी चाहिए।

वहीं भाजपा से नाराज चल रही शिवसेना ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि राम मंदिर मामले में अदालतें कुछ नहीं करेंगी। शिवसेना नेता संजय राउत ने हम इस बात पर ध्यान नहीं दे रहे हैं कि उच्चतम न्यायालय क्या फैसला देता है और क्या तारीख देता है।

हम ध्यान देना नहीं चाहते। राम मंदिर मामले में अदालत कुछ नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि हमने 25 साल पहले बाबरी ढांचे को गिराने से पहले अदालत से नहीं पूछा था।

राउत ने कहा कि शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे 25 नवंबर को अयोध्या पहुंचेंगे। वह राम लला का दर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि हमारे सैकड़ों हजारों कारसेवक अदालत से अनुमति मांगकर शहीद नहीं हुए थे। हमने अदालत की मंजूरी लेकर अयोध्या पर कोई आंदोलन शुरू नहीं किया था।

शिवसेना नेता ने कहा कि हमें लगता है कि अयोध्या में राम मंदिर होना चाहिए। हम पाकिस्तान में इसमंदिर की मांग नहीं कर रहे बल्कि प्रभु श्री राम की अयोध्या में चाहते हैं।

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