Friday , December 15 2017

राष्ट्रीय कौंसिल उर्दू ‘विवादास्पद हुकुमनामह से वापस

नई दिल्ली: राष्ट्रीय कौंसिल उर्दू ने इस विवादास्पद हुकुमनामह से अस्वीकरण अपनाया जिससे लेखकों को बाध्य किया गया था कि वे प्रतिज्ञा करें कि उनकी पुस्तकों में सरकार या विभाग के खिलाफ कोई बात‌ नहीं है। कई उर्दू लेखकों और एडीटर्स इस साल मार्च से ऐसे फॉर्म्स प्राप्त हुए थे जिनमें उनसे कहा गया था कि वह दो गवाहों के हस्ताक्षर प्रदान करें।

इस फार्म में जो राष्ट्रीय कौंसिल उर्दू से वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए था यह दर्ज था कि मेरी किताब में भारत सरकार की नीतियों के खिलाफ या राष्ट्र के हित के खिलाफ कोई बात‌ नहीं है। इस फार्म अब परिषद की वेबसाइट से हटा लिया गया है। इस फार्म पर गंभीर आलोचना करने वाली विश्वविद्यालय कोलकाता प्रोफेसर शाह नाज ने कहा कि दो गवाहों से फार्म पर हस्ताक्षर करवाना अपमानजनक था। इस तरह प्रतिक्रिया व्यक्त की स्वतंत्रता गुणा लगती है।

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