Friday , June 22 2018

राहुल से मुलायम भी खफा

कांग्रेस के नायब सदर राहुल गांधी का मुजफ्फरनगर के राहत कैंपो का दौरा कर वहां के हालात को बदहाल बताना समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव को भी नागवार गुजरा। उन्होंने कहा कि आवाम को भटकाने की साजिशें की जा रही हैं।

कांग्रेस के नायब सदर राहुल गांधी का मुजफ्फरनगर के राहत कैंपो का दौरा कर वहां के हालात को बदहाल बताना समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव को भी नागवार गुजरा। उन्होंने कहा कि आवाम को भटकाने की साजिशें की जा रही हैं।

मुलायम ने लखनऊ में सहाफियों से बातचीत में कहा कि उत्तर प्रदेश में आवाम को बहकाने के लिए साजिशें की जा रही हैं।

राहुल गांधी का नाम लिए बगैर मुलायम ने कहा कि बिना इत्तेला शामली के एक राहत कैंप में जाकर बेवजह एक इंतेखाबी मुद्दा बनाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि सपा हुकूमत ने मुजफ्फरनगर-शामली के मुतास्सिरों की जितनी मदद की है, कभी कोई ह्कूमत नहीं कर सकती। सपा हुकूमत ने दंगा के मुतास्सिरों को मकान बनाने के लिए 5-5 लाख रुपये दिए।

हलाक हुए लोगो के घर वालो को नौकरी दी गई। कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी के राज में हुए दंगों के मुतास्सिरों को किसी ने इंसाफ नहीं दिया।

वहीं, वज़ीर ए आला अखिलेश यादव ने राहुल के मुजफ्फरनगर के अचानक दौरे के बाबत पूछे जाने पर एक बार फिर दोहराया कि कांग्रेस के लीडर वहां गए थे। अगर वह सुझाव देंगे तो अमल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राहुल के अचानक राहत कैंप पहुंचने पर मुझे कोई नाराजगी नहीं है, क्योंकि वह ऐसे ही दौरे करते रहे हैं। ये उनकी अंदाज़ है।

गौरतलब है कि राहुल इतवार को बिना किसी इत्तेला के शामली-मुजफ्फरनगर पहुंच गए थे। वहां उन्होंने एक राहत कैंप जाकर दंगा के मुतास्सिरों से मुलाकात कर उनकी परेशानियां सुनी थीं। बाद में उन्होंने अखिलेश हुकूमत पर हमला करते हुए कहा था कि राहत कैंपो में हालात बेहद खराब हैं और बच्चे मर रहे हैं। अखिलेश की हुकूमत को हालात और बेहतर करने की जरूरत है।

सपा और कांग्रेस के बीच हो रही इस बयानबाजी पर बीजेपी ने तीखी रद्दे अमल ज़ाहिर करते हुए कहा कि सपा-कांग्रेस के लोग मुजफ्फरनगर में अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। बीजेपी के रियासती तर्जुमान विजय बहादुर पाठक ने कहा कि कांग्रेस व सपा की तरफ से हो रही बयानबाजी में दंगा के मुतास्सिर पिस रहे हैं। मुतास्सिर अपने ही जिले में पनाहगजीन के तौर पर रहने को मजबूर हैं।

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