रिपोर्ट में दावा- खशोगी के आखिरी शब्द थे “मैं सांस नहीं ले पा रहा हूं”

रिपोर्ट में दावा- खशोगी के आखिरी शब्द थे “मैं सांस नहीं ले पा रहा हूं”

इस्तांबुल में सऊदी वाणिज्य दूतावास में मारे गए पत्रकार जमाल खशोगी के आखिरी शब्द थे‘‘मैं सांस नहीं ले पा रहा’’। ‘सीएनएन’ ने पत्रकार के जीवन के अंतिम क्षणों के ऑडियो टेप की प्रतिलिपी पढ़ चुके एक सूत्र के हवाले से यह जानकारी दी। सूत्र ने ‘सीएनएन’ को बताया कि प्रतिलिपी से स्पष्ट है कि हत्या पूर्व नियोजित थी और इस संबंध में पल-पल की जानकारी देने के लिए कई फोन भी किए गए थे।

‘सीएनएन’ ने कहा कि तुर्की अधिकारियों का मानना है कि ये फोन रियाद में शीर्ष अधिकारियों को किए गए थे और प्रतिलिपी के अनुसार खशोगी ने अपने आखिरी क्षणों में काफी जिद्दोजहद की थी। मूल प्रतिलिपी तुर्की की खुफिया सेवा ने तैयार की थी।

इस बीच, सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने खशोगी की हत्या के संदिग्धों को प्रत्यर्पित करने की तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन की मांग को रविवार को खारिज कर दिया। तुर्की के अनुसार सऊदी के 15 सदस्यीय दल को खशोगी की हत्या के लिए इस्तांबुल भेजा गया था।

बता दें खशोगी अमेरिकी निवासी थे। उन्होंने सऊदी अरब के राजकुमार सलमान के शासन और उनके बेटे मोहम्मद बिन सलमान के खिलाफ भी कई लेख लिखे थे। आखिरी बार वह 2 अक्तूबर को इस्तांबुल स्थित सऊदी दूतावास के अंदर जाते हुए देखे गए थे। तुर्की के अधिकारियों के अनुसार उन्हें लगता है कि दूतावास के अंदर खशोगी की हत्या कर दी गई है।

रिकॉर्डिंग की ट्रांसक्रिप्ट में बताया गया है कि खशोगी ने मौत से पहले अपने हत्यारों का काफी विरोध किया था। वहीं मामले से जुड़ी ओरिजिनल ट्रांसक्रिप्ट तुर्की की जांच एजेंसी ने बनाई थी। तुर्की का कहना है कि खशोगी की हत्या के लिए सऊदी से 15 लोगों की एक टीम तो इस्तांबुल भेजा गया था। तुर्की इन्हीं संदिग्धों की मांग कर रहा है। लेकिन सऊदी ने संदिग्धों के भेजने की मांग को मानने से इनकार कर दिया है। रिपोर्ट में ट्रांसक्रिप्ट से ये दावा किया गया है कि सऊदी मानता है कि ये ऑपरेशन गलत हो गया था।

इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि सऊदी अरब के साथ रणनीतिक संबंध बनाए रखना और तेल की वैश्विक कीमतों पर लगाम लगाए रखना अमेरिका के सर्वश्रेष्ठ हित में है। ट्रंप ने सऊदी के साथ खड़े रहने की बात कही थी। ट्रंप ने कहा था कि अगर अमेरिका सऊदी से रिश्ते खत्म कर देगा तो चीन और रूस फायदा उठा लेंगे।

ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा था, ‘‘ऐसा इसलिए क्योंकि मेरे लिए अमेरिका पहले आता है।’’ उन्होंने कहा कि खशोगी की हत्या के बावजूद अमेरिका अपने हित साधने और उस क्षेत्र में मौजूद इजराइल तथा अन्य सहयोगियों के हितों के लिए सऊदी अरब का मित्र बना रहेगा। ट्रंप ने कहा था, “हमारा महत्वपूर्ण लक्ष्य पूरी दुनिया से आतंकवाद के खतरे को खत्म करना है।” वहीं सऊदी अरब के विदेश मंत्री अदेल अल-जुबेर भी इस बात को मान चुके हैं कि पत्रकार खशोगी की हत्या “एक गलती और दुष्ट ऑपरेशन” था।

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