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रियासती हुकूमत का वजूद काग़ज़ी हद तक महिदूद

आंध्र प्रदेश की तक़सीम का अमल शुरू होचुका है कि अब इस रियासत में हुकूमत का वजूद सिर्फ़ काग़ज़ी हक़ीक़त तक महिदूद रह गया है।

आंध्र प्रदेश की तक़सीम का अमल शुरू होचुका है कि अब इस रियासत में हुकूमत का वजूद सिर्फ़ काग़ज़ी हक़ीक़त तक महिदूद रह गया है।

गवर्नर ने चीफ़ मिनिस्टर किरण कुमार रेड्डी का स्तीफ़ा क़बूल करते हुए आलामीया भी जारी कर दिया है चुनांचे अमली मक़ासिद के लिए अब हुकूमत का कोई वजूद ही नहीं रहा है।

किरण कुमार रेड्डी ने रियासत की तक़सीम के ख़िलाफ़ एहतेजाज करते हुए 19 फ़बरोरी को स्तीफ़ा दिया था जिस पर गवर्नर ई ऐस एल नरसिम्हन ने मर्कज़ को फ़िलफ़ौर रिपोर्ट रवाना की थी और रियासत में सदर राज नाफ़िज़ करने की सिफ़ारिश भी की थी।

गवर्नर ने अपनी दरख़ास्त पर मर्कज़ के जवाब का दो दिन तक इंतेज़ार किया लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ और इसी तौर पर उन्होंने 21फ़बरोरी को आलामीया जारी करते हुए मजलिस वुज़रा का स्तीफ़ा मंज़ूर करलिया था।

किरण कुमार रेड्डी ने ना सिर्फ़ चीफ़ मिनिस्टर के ओहदे से स्तीफ़ा दिया था बल्कि कांग्रेस पार्टी छोड़ ने का एलान भी किया था। बादअज़ां उनके चार या पाँच का बीनी रफ़क़ा ने भी हुक्मराँ जमात से अलहिदगी का इशारा दिया था।

गवर्नर ने किरण और उनकी मजलिस वुज़रा में शामिल रफ़क़ा को मुतबादिल इंतेज़ामात तक अपने ओहदों पर फ़राइज़ अंजाम देने का मश्वरह दिया था जहां से सूरत-ए-हाल ने एक अजीब मोड़ इख़तियार करलिया क्युंकि किरण कुमार रेड्डी अब बराए नाम निगरानकार चीफ़ मिनिस्टर के फ़राइज़ अंजाम देने से भी इनकार कर दिया है।

किरण पहले ही अपने दफ़्तर के तमाम आला ओहदेदारों के तबादले करचुके थे और सरकारी बंगले का तख़लिया भी कर दिया था। एक आला सरकारी ओहदेदार ने कहा कि वो (कर्ण रेड्डी) हम से रोज़मर्रा की तफ़सीलात की समाअत करने से भी गुरेज़ कररहे हैं।

लेकिन इस सूरते हाल से कई वुज़रा सीमांध्र से ताल्लुक़ रखने वालों को सख़्त मायूसी हुई है। क्युंकि वो अगरचे तकनीकी एतबार से वज़ीर हैं लेकिन कोई भी ओहदेदार उनकी हिदायात-ओ-अहकाम पर अमल करने तैयार नहीं हैं।

यहां ये बात भी दिलचस्प हैके तेलंगाना से ताल्लुक़ रखने वाले वुज़रा नई रियासत के क़ियाम का जश्न मनाने में मसरूफ़ हैं। दिल्ली में कैंप किए हुए एक वज़ीर से रब्त पैदा किए जाने पर उन्होंने कहा हम वज़ीर हैं या नहीं हैं ये बात अब शायद ही कोई एहमीयत रखती है लेकिन तमाम क़ाइदीन ने हुकूमत का फ़ैसला कांग्रेस पार्टी हाईकमान की मर्ज़ी पर छोड़ दिया है।

इब्तिदा में नई दिल्ली से अगरचे ये इत्तेलाआत मौसूल होरही थीं कि मर्कज़ इस रियासत में सदर राज के नफ़ाज़ पर ग़ौर कररहा है क्युंकि रियासती असेंबली के चुनाव के लिए बमुश्किल दो माह बाक़ी रह गए हैं फ़ैसले से पहले सूरते हाल का बग़ौर जायज़ा लेने का मंसूबा बनाया है।

चंद रियासती वुज़रा अपनी पार्टी से अरकाने असेंबली के इमकानी फैसलें को रोकने के लिए चीफ़ मिनिस्टर के ओहदे के लिए हाईकमान से नुमाइंदगी कररहे हैं।

आंधरा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदर और वज़ीर ट्रांसपोर्ट बोतसा सत्य नारावना और वज़ीर-ए-ज़राअत कन्ना लक्ष्मी नारावना चीफ़ मिनिस्टर के ओहदे के लिए अहम और ताक़तवर दावेदारों की हैसियत से उभरे हैं लेकिन आँम राम नारायण रेड्डी और एन रग्घूवीरा रेड्डी भी सीमांध्र के दुसरे अहम उम्मीदवारों में शामिल हैं।

बयान किया जाता हैके कन्ना लकशमया नाराय‌ना ने पिछ्ले रोज़ नई दिल्ली में कांग्रेस की सदर सोनिया गांधी से मुलाक़ात की और चीफ़ मिनिस्टर के ओहदे के लिए अपना अदा-ए-पेश किया ताहम सोनिया गांधी ने उसकी दरख़ास्त क़बूल करने से इनकार कर दिया।

सीमांध्र के तक़रीबन एक दर्जन अरकाने असेंबली पहले ही कांग्रेस छोड़ चुके हैं। चंद तेलुगु देशम में शामिल हुए और चंद दूसरे फ़िलहाल किरण कुमार रेड्डी की तरफ़ से नई पार्टी के इमकानी क़ियाम का इंतेज़ार कररहे हैं।

किरण कुमार की तरफ़ से नई पार्टी के क़ियाम की सूरत में कम से कम निस्फ़ दर्जन वुज़रा और मुतअद्दिद अरकाने असेंबली कांग्रेस से हट जाएंगे। चंद तेलुगु देशम में जाने के इमकानात पर भी ग़ौर कररहे हैं।

एक सीनियर रुकने असेंबली ने कहा कि जिन को तेलुगु देशम या वाई एस आर कांग्रेस पार्टी में दाख़िला नहीं मिलसका उनके पास कांग्रेस में ही बरक़रार रहने के सिवा-ए-कोई दूसरा रास्ता नहीं रहेगा।

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