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रिश्तेदारों को याद कर फफक पड़े साबिक़ वजीर अश्विनी चौबे

पटना 27 जून : केदारनाथ को देखने, भोगने वाले साबिक़ सेहत वजीर अश्रि्वनी कुमार चौबे बुध दोपहर खिदमत तय्यारे से पटना पहुंचे। आपबीती सुनाने के दौरान रिश्तेदारों को याद कर वे बुरी तरह फफक पड़े। उन्होंने उत्तराखंड की खौफनाक के लिए उत्तर

पटना 27 जून : केदारनाथ को देखने, भोगने वाले साबिक़ सेहत वजीर अश्रि्वनी कुमार चौबे बुध दोपहर खिदमत तय्यारे से पटना पहुंचे। आपबीती सुनाने के दौरान रिश्तेदारों को याद कर वे बुरी तरह फफक पड़े। उन्होंने उत्तराखंड की खौफनाक के लिए उत्तराखंड इंतेजामिया को कठघरे में खड़ा किया। रियासत हुकूमत की हेससियत पर भी सवाल उठाए।

16 जून की वाकिया को याद करते हुए चौबे ने बताया कि पूरे खानदान के साथ वे मंदिर के अन्दर में थे। इसी वक़्त हादसा हुआ। दो दिन तक वे मंदिर के अन्दर में ही भूखे-प्यासे फंसे रहे। मुकामी इंतेजामिया को इत्तेला देने के बावजूद कोई राहत नहीं पहुंची। 17 तारीख को बिहार हुकूमत को भी इत्तेला दी गई। वहां से भी राहत पहुंचाने की सिम्त में कोई कोशिश नहीं किया गया। उत्तराखंड हुकूमत को आड़े हाथ लेते हुए उन्होंने कहा कि मौसम महकमा ने खतरे की ख्द्सा जताई थी। इसके बावजूद हुकूमत ने मुसाफिरों को रोकने की सिम्त में कोई पहल नहीं की। सनहा के बाद इमदाद कामों में भी जबरदस्त ढिलाई बरती गई। तमाम लोगों की मौत वक़्त पर मदद न मिलने की वजह वाकिया हो गई। 20 जून को भाजपा के कौमी सदर राजनाथ सिंह की पहल पर मैं सकुशल दिल्ली पहुंच सका।

चौबे के मुताबिक मुझे जिंदगी भर इस बात का अफसोस रहेगा कि मैं सभी को महफूज लेकर वापस नहीं लौट सका। मेरे साढ़ू और सीनियर रिपोर्टर सुबोध मिश्र, उनकी पत्नी संगीता, भतीजा रमन जी तिवारी, सिक्यूरिटी अहलकार फूलन ओझा, देवेंद्र प्रसाद सिंह, अजय कुमार मिश्र, मेरे पुरोहित दीनानाथ झा सनहा के शिकार हो गए।

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