Thursday , June 21 2018

रीवैन्यु एरीलेशन और पुलिस ओहदेदारों का वक़्फ़ जमीनों का मुआइना

शमसाबाद । (सियासत न्यूज़) शमसाबाद के मौज़ा नरखोड़ा में दरगाह हज़रत अज़ीज़ उल-मलिक और फ़रंगी नाला का रीवैन्यू एरीलेशन और पुलिस ओहदेदारों ने दौरा करते हुए मुक़ामी अफ़राद से तमाम तफ्सीलात हासिल की।

शमसाबाद । (सियासत न्यूज़) शमसाबाद के मौज़ा नरखोड़ा में दरगाह हज़रत अज़ीज़ उल-मलिक और फ़रंगी नाला का रीवैन्यू एरीलेशन और पुलिस ओहदेदारों ने दौरा करते हुए मुक़ामी अफ़राद से तमाम तफ्सीलात हासिल की।

मुहम्मद अबदूल्मुक़ीत पटेल के बमूजब एम आर ओ वेंकट रेड्डी ने तमाम तफ़सीलात हासिल करने के बाद रवींद्र रेड्डी के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का तयक्कुन‌ दिया।

एरीलेशन ओहदेदार भी फ़रंगी नाला का तफ़सीली मुआइना करने के बाद उस की सफ़ाई करने के अहकामात जारी कर दिए। 800 साला क़दीम आलमगीर ज़माना की दरगाह पर कई सालों से अतराफ़-ओ-अकनाफ़ की अवाम शादी के दूसरे दिन अज़ीज़ उल-मलिक दरगाह पर नयाज़ करते हैं। आज सुबह सत्या ने भी ने भी अपनी बेटी की शादी के बाद इस दरगाह पहुंच कर नयाज़ किया जिस में कई अफ़राद ने शिरकत की।

रवींद्र रेड्डी मुक़द्दस मुक़ामात को निशाना बनाते हुए मंदिर तोड़ कर मूर्तियों को हिमायत सागर में फेंक दिया और वक़्फ़ अराज़ी पर क़ब्ज़ा करते हुए अपनी शैतानी हरकत ज़ाहिर करदी।

मुहम्मद अबद उलमूक़ीत पटेल ने कहा कि दरगाह और मंदिर की अराज़ी की हिफ़ाज़त के लिए हीन्दू और मुसल्मानों ने यकजहती का मुज़ाहरा करते हुए साबित कर दिया कि शमसाबाद क़ौमी यकजीहती का गहवारा है। मुक़ामी अफ़राद ने रीवैन्यू ओहदेदार, एरीलेशन और पुलिस ओहदेदारों से अपील करते हुए कहा कि रवींद्र रेड्डी को फ़ौरन गिरफ़्तार करते हुए इस के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करें।

मुहम्मद अबद उलमूक़ीत पटेल और अफ़ज़ल हुसैन ने होम मिनिस्टर मिसिज़ सबीता इंदिरा रेड्डी, मर्कज़ी वज़ीर पेट्रोलीयम-ओ-गैस जय‌ पाल रेड्डी और राजिंद्र नगर रुक्न असेंबली टी प्रकाश गौड़ से अपील की है कि वो वक़्फ़ अराज़ी और मंदिर की अराज़ी के लिए हिफ़ाज़ती इंतिज़ामात करते हुए रवींद्र रेड्डी के ख़िलाफ़ क्रीमिनल केस दर्ज करके सख़्त कार्रवाई करें।

इस मौक़ा पर बी वीनू गोपाल तेल्गुदेशम स्टेट सेक्रेटरी, चंद्रा रेड्डी, मिर्ज़ा ग़ौस अली बेग, ज़फ़र अली, साबिर, मज़हर अली, मन्नान, विश्वानाथम, गोपाल, नागेश गौड़ के इलावा अवाम की कसीर तादाद ने शिरकत कीं।

दरगाह अज़ीज़ उल‍ मलीक पर आज भी फ़ातिहा ख़वानी की गई और चादर चढ़ाई गई।

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