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रेप के खिलाफ कानून पर हुकूमत में इख्तेलाफात

नई दिल्ली, 07 मार्च: ख्वातीन से रेप के खिलाफ सख्त कानून की पैरवी को लेकर हुकूमत के अंदर ही एक राय नहीं दिख रही है। खबरों के मुताबिक हुकूमत के ही दो वज़ारतों के बीच इस कानून पर सहमति नहीं बन पा रही है।

नई दिल्ली, 07 मार्च: ख्वातीन से रेप के खिलाफ सख्त कानून की पैरवी को लेकर हुकूमत के अंदर ही एक राय नहीं दिख रही है। खबरों के मुताबिक हुकूमत के ही दो वज़ारतों के बीच इस कानून पर सहमति नहीं बन पा रही है।

पहले माना जा रहा था कि नए कानून के मसौदे को जुमेरात को कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। लेकिन अचानक इसे लिस्ट से हटा दिया गया। दरअसल कानून के मसौदे को लेकर वज़ारत दाखिला और कानून वज़ारत के बीच तनाज़ात है। खासकर आपसी सहमति से जिस्मानी रिश्ते बनाने की उम्र 18 से घटाकर 16 साल करने को लेकर।

गौरतलब है कि ख्वातीन की सेक्युरिटी से जुड़ा कानून इस वक्त हुकूमत की सबसे बड़ी चिंता है। गुजश्ता दिसंबर में हुए दिल्ली गैंगरेप के वाकिया के बाद से लोग सख्त कानून की मांग कर रहे हैं। इस मसले पर हुकूमत ने जल्दबाजी में एक फरमान लागू कर दिया है।

इस फरमान की जगह हुकूमत अब एक बिल लाना चाहती है जो जुमेरात को पेश नहीं हो पाया। रेप के खिलाफ लागू फरमान में हुकूमत ने कुछ जरूरी बदलाव करके यह बिल बनाया है। कानून मंत्री का कहना है कि ख्वातीन तंज़ीमो की मांग को देखते हुए यह बदलाव किए गए हैं।

दिल्ली गैंग रेप के वाकिया के बाद रेप के खिलाफ जारी फरमान में फेरबदल करके हुकूमत ने एक नया बिल बनाया है। नए बिल में कई फेरबदल किए गए हैं। इसमें जिस्मानी ताल्लुकात बनाने के लिए रजामंदी की कम से कम उम्र 18 से घटाकर 16 साल कर दी गई है।

मौजूदा बिल के मुताबिक लड़की की उम्र 18 साल से कम होने पर जिस्मानी रिश्ते को रेप के दर्जे में रखा जाता है। मौजूदा बिल में सरकारी या निजी अस्पतालों के लिए रेप की मुतास्सिरा का इलाज करना लाज़मी कर दिया गया है।

ऐसा नहीं करने पर सजा का भी कानून है। वज़ारत (कानून) ने जिंसी ज़्यादती की जगह रेप या बलात्कार अल्फाज़ का दोबारा इस्तेमाल किया है।

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