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रेल किराया बढ़ने के इम्कान

पिछले हफ्ते किराये और पार्सल रेट में बढ़ोतरी के बाद रेल सारिफीन एक और झटके के लिए तैयार रहें। इस बार बोझ माल ढोने वालों के इलावा मुसाफिरों को भी सहना पड़ सकता है। रेलवे 7 अक्टूबर से एफएसी के नाम पर किराये एवं भाड़े में दो फीसद तक की बढ

पिछले हफ्ते किराये और पार्सल रेट में बढ़ोतरी के बाद रेल सारिफीन एक और झटके के लिए तैयार रहें। इस बार बोझ माल ढोने वालों के इलावा मुसाफिरों को भी सहना पड़ सकता है। रेलवे 7 अक्टूबर से एफएसी के नाम पर किराये एवं भाड़े में दो फीसद तक की बढ़ोतरी करने का मन बना चुका है। रेल के वज़ीर मल्लिकार्जुन खड़गे और रेल के यूनियन मिनिस्टर अधीर रंजन चौधरी पिछले दिनों इसके इशारे दे चुके हैं।

डीजल और बिजली की दरों में इज़ाफा से रेलवे की बढ़ी लागतों को मुसाफिरों पर डालने के इस तरीके का ऐलान 2013-14 के बजट में साबिक रेलमंत्री पवन कुमार बंसल ने किया था। इसे हर छह महीनों में लागू करने की बात कही गई थी। इसी के तहत अक्तूबर में इस अमल को अपनाया जा रहा है। हालांकि पिछले दिनों जब माल भाड़े और राजधानी-शताब्दी-दूरंतो की पार्सल दरों में बढ़ोतरी की गई तो ऐसा लगा था कि शायद एफएसी को लागू करने से बचने के लिए ऐसा किया गया है।

लेकिन अब तकरीबन तय हो गया है कि हुकुमत लोकसभा इंतेखाबात के लिए पांच विधानसभा इंतेखाबात में जोखिम उठाने को तैयार है। आम तौर पर माना जाता है कि मरकज़ी हुकूमत के फैसले विधानसभा इलेक्शनो के नतीज़ो को उतना मुतास्सिर नहीं करते और वहां मुकामी कारकुन के ही अहम किरदार हैं।

यह फैसला अगर लागू होता है तो इससे रेलवे को चालू फायनेंशियल ईयर की बची हुई मुद्दत में 1250 करोड़ रुपये की इज़ाफी कमाई होगी।

पिछले छह माह के दौरान डीजल की कीमतों में तकरीबन साढ़े सात फीसद और बिजली की कीमतों में इससे दोगुनी बढोतरी हो चुकी है। इसकेनतीजे में एफएसी के तहत एसी और स्लीपर दर्जो के रेल किरायों में तकरीबन दो फीसद की बढ़ोतरी होने के इम्कान है। इसके इलावा माल भाड़े में भी 1.7 फीसद तक की बढ़ोतरी की जाएगी। अभी पिछले हफ्ते ही रेलवे ने सरचार्ज के तहत अक्तूबर से अगले साल जून तक के लिए तकरीबन सभी चीजों के माल भाड़ों में 15 फीसद की बढ़ोतरी का ऐलान किया था।

जबकि अब एफएसी से मुताल्लिक मालभाड़ा बढ़ोतरी 10 अक्टूबर से लागू होने के आसार हैं। दूसरी ओर किरायों में दो फीसद तक की बढ़ोतरी सात अक्टूबर से ही लागू हो सकती है। छह महीने बाद एफएसी फिर से कायम होगी और जरूरत पड़ी तो फिर किराये-भाड़े बढ़ सकते हैं।

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