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रोजाना 20 हजार नाबालिग बनती हैं दुल्हन, हर 2 सेकंड में 1 बालिका वधू : रिपोर्ट

नयी दिल्ली : वर्ल्ड बैंक और बाल अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था सेव द चिल्ड्रन की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में हर साल 75 लाख लड़कियां बाल विवाह का शिकार होती हैं और सबसे अधिक बाल विवाह पश्चिमी और मध्य अफ्रीका में होते हैं. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट का कहना है की 150 लाख से अधिक अतिरिक्त लड़कियों का विवाह 2030 तक 18 साल की उम्र से पहले हो जाएगा।

भारत जैसे विकासशील देशों को बाल विवाह के कारण सन 2030 तक कई खरब डॉलर का नुकसान उठाना होगा. विश्व बैंक के अनुसार, यह कुप्रथा गरीबी मिटाने के वैश्विक प्रयासों की राह में एक बहुत बड़ी रुकावट है. केवल इसे रोकने भर से राष्ट्रीय आय में औसतन एक फीसदी की बढ़ोत्तरी हो सकती है.

इंटरनेशनल सेंटर फॉर रिसर्च ऑन वीमेन के अनुसार, हर साल 1.5 करोड़ लड़कियों की शादी 18 साल से कम उम्र में हो रही है. यानि हर दो सेकंड में एक नाबालिग लड़की की शादी होती है. नाइजर में 77 फीसदी जबकि बांग्लादेश में 59 फीसदी है बाल विवाह का आंकड़ा.

दुनिया भर में 70 करोड़ महिलाएं ऐसी हैं जिनकी शादी 18 साल से कम उम्र में हो गई थी. करीब 25 करोड़ की 15 साल से भी पहले. यूनिसेफ की सूची में बांग्लादेश का नंबर चौथा और भारत का 12वां है. भारत में बाल विवाह गैर कानूनी होने के बावजूद अभी भी लड़कियों की शादी 18 से कम उम्र में कर दी जाती है.

जिम्मेदार समाज
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे विवाहों का सबसे बड़ा कारण सामाजिक परंपराएं और धार्मिक प्रथायें हैं जिनके चलते बाल विवाह कानूनों को समाजिक स्वीकारता नहीं मिलती है और प्रथाओं के नाम पर ये समाज में बने रहते हैं.

शिक्षा और स्वास्थ्य
रिपोर्ट के मुताबिक बाल विवाह लड़कियों को न सिर्फ शिक्षा के अवसरों से वंचित करता है बल्कि उनकी सेहत पर भी बुरा असर डालते हैं. इन लड़कियों पर घरेलू हिंसा और यौन प्रताड़ना का खतरा भी बना रहता है.

गरीबी बनी वजह
स्टडी में गरीबी को इसकी एक बड़ी वजह बताया गया है. कई बार अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए भी मां-बाप अपनी लड़कियों की जल्दी शादी करा देते हैं और अफ्रीका में दुल्हन पर तो कीमत भी मिलती है.

कानून भी नहीं
वर्ल्ड बैंक ने जून 2016 की एक रिपोर्ट में कहा था कि बाल विवाह पर रोक से जनसंख्या वृद्धि दर पर लगाम लगेगी और लड़कियों के शैक्षणिक स्तर में बेहतरी आयेगी. रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया की तकरीबन 10 करोड़ लड़कियों के पास ऐसे विवाहों से बचने के लिए कानून नहीं है.


बाली उम्र में विवाह करने वाली युवतियों के मामले में बंगाल के बाद क्रमशः बिहार, झारखंड और आंध्र प्रदेश का स्थान है. रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में लगभग 44 फीसदी महिलाएं न्यूनतम कानूनी उम्र तक पहुंचने से पहले ही शादी कर लेती हैं. इस मामले में पांच फीसदी आंकड़े के साथ लक्षद्वीप का स्थान सबसे नीचे है. रिपोर्ट के मुताबिक, देश में कम उम्र में होने वाली शादियों की तादद समय के साथ घट रही है.

सर्वेक्षण में देश की 5.78 लाख महिलाओं का शामिल किया गया था. इससे उनके यौन आचरण के बारे में भी कई दिलचस्प जानकारियां सामने आई हैं. इसमें कहा गया है कि 25 से 49 आयु वर्ग की 10 फीसदी महिलाओं ने 15 साल की उम्र से पहले ही यौन संबंध बना लिए थे, जबकि 18 साल की उम्र से पहले ऐसा करने वाली महिलाओं की तादाद 38 फीसदी थी. इस मामले में ग्रामीण इलाकों की महिलाएं शहरी महिलाओं के मुकाबले आगे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, शहरी महिलाएं ग्रामीण महिलाओं के मुकाबले दो साल देरी से यौन संबंध बनाती हैं.

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