Tuesday , June 19 2018

रोज 5.84 करोड़ की कोयला चोरी, हर माह पुलिस की कमाई 19.48 करोड़!

रियासत के पांच जिलों रामगढ़, हजारीबाग, गिरिडीह, धनबाद और बोकारो में कोयले के गैर कारोबार से हर माह कम से कम 34.09 करोड़ रुपये की कमाई की जा रही है। इस काली कमाई में पुलिस महकमा के अफसरों को सबसे ज़्यादा हिस्सा 19.48 करोड़ रुपये (हर माह) मिलता

रियासत के पांच जिलों रामगढ़, हजारीबाग, गिरिडीह, धनबाद और बोकारो में कोयले के गैर कारोबार से हर माह कम से कम 34.09 करोड़ रुपये की कमाई की जा रही है। इस काली कमाई में पुलिस महकमा के अफसरों को सबसे ज़्यादा हिस्सा 19.48 करोड़ रुपये (हर माह) मिलता है। कनीय पुलिस अफसरों से लेकर पुलिस के आला अफसरों तक उनका हिस्सा पहुंचता है। हालांकि कुछ ईमानदार अफसर भी हैं, जो इस गैर कानूनी धंधे से सरोकार नहीं रखते, लेकिन वे भी इस धंधे को रोक पाने में काबिल नहीं हैं। यही वजह है कि कोयले की चोरी और गैर कानूनी कारोबार रुक नहीं रहे हैं। कोयला चोरी की कमाई में रियासत के बड़े लीडरों का भी हिस्सा होता है। लीडरों तक भी हर जिले से हर महीने तय रकम पहुंच जाती है। जिलों के पुलिस अफसरों को फी ट्रक के हिसाब से रकम मिलती है, जबकि आला मुकर्रिर अफसर हर कारोबारी से माह के हिसाब से लाखों की वसूली करते हैं।

अफसर से लेकर लीडर तक के हिस्से तय : जानकारी के मुताबिक, एक ट्रक चोरी के कोयले से तकरीबन 35 हजार रुपये की कमाई होती है। इसमें से 25 हजार रुपये सरकारी महकमा के अफसरों को मिलते हैं और 10 हजार रुपये कोयला कारोबारियों को बचता है। हर दिन 487 ट्रक चोरी का कोयला बेचे जाने से 1.70 करोड़ रुपये मिलते हैं। इस तरह हर माह (20 दिन ही कोयला चोरी का काम चलता है) 34.09 करोड़ रुपये की कमाई होती है। एक ट्रक गैर कानूनी कोयले से पुलिस महकमा के अफसरों को 20 हजार रुपये मिलता है। बताया जाता है कि इसमें से 10 हजार रुपये जिले में रहता है।

पांच हजार रुपये हुकूमत के आला लोगों तक पहुंच रखनेवाले लोगों तक पहुंचाया जाता है। पांच हजार रुपये का बंटवारा जिला सतह से ऊपर के अफसरों के दरमियान किया जाता है। इसी तरह जंगल महकमा, जिला इंतेजामिया व दीगर अफसर, लीडर, मीडिया और जीटी रोड पर पड़नेवाले झारखंड-बिहार के थानों को मैनेज करने में पांच हजार रुपये फी ट्रक खर्च आता है। ज़राये के मुताबिक, एक जिले के बड़े एड्मिनिस्ट्रेटिव अफसर भी कोयला कारोबारियों से अपना हिस्सा वसूलते हैं।

कमाई घटने से अफसरों में गुस्सा

इधर, यह भी इत्तिला है कि कोयले की काली कमाई घटने से धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, हजारीबाग व रामगढ़ जिले के पुलिस अफसरों में गुस्सा है। कहने को वे मलाईदार जिलो में मुकर्रर हैं। पर कोयले की गैर कानूनी कमाई से उन्हें कुछ खास नहीं मिल पा रहा है। सब कुछ ऊपर से ही मैनेज हो रहा है। सीनियर अफसर सीधे फैक्टरी मालिक से वसूली कर ले रहे हैं। जूनियर पुलिस ओहदेदारों की हालत यह है कि अगर वे गैर कानूनी कोयला लदे ट्रकों को रोक दें, तो उनकी शामत आ जाये।

पहली रिपोर्ट

झारखंड में सीसीएल और बीसीसीएल की बंद पड़ी खदानों व फॉरेस्ट लैंड से हर दिन कम से कम 487 ट्रक यानी 9740 टन कोयले की चोरी हो रही है। एक ट्रक में 20 टन कोयला आता है। मंडी में एक ट्रक चोरी का कोयला 1.20 लाख रुपये (फी टन 6000 रुपये की शरह से) में बिकता है। इस तरह हर दिन 5.84 करोड़ रुपये कीमत के कोयले की चोरी होती है। रियासत के धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, हजारीबाग और रामगढ़ जिलों में कोयला चोरी का धंधा जोरों पर है। चोरी का कोयला डेहरी और बनारस वाकेय मंडियों के अलावा झारखंड-बिहार के तमाम जिलों में वाकेय ईंट-भट्ठों और मुखतलिफ़ फैक्टरियों में पहुंचाया जाता है। कोयले के इस गैर कानूनी धंधे में पुलिस अफसर, जंगल महकमा व जिला इंतेजामिया के अफसरों के साथ राजनेता भी शामिल हैं।

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