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रोहिंग्या मुसलमानों के नरसंहार पर मुस्लिम शासकों और वैश्विक संस्थाओं की चुप्पी अपराध के बराबर: मुफ्ती उस्मानी

नई दिल्ली। इमाम क़ासिम इस्लामिक एजुकेशनल वेल्फेयर ट्रस्ट नई दिल्ली द्वारा जारी प्रेस रिलीज़ में मौलाना उस्मानी ने कहा है कि बर्मा के मुसलमानों के नरसंहार पर संयुक्त राष्ट्र की चुप्पी जहां कई सवालों को जन्म देती है, वहीं इस अंतर्राष्टीय संस्था की मुस्लिम विरोधी चिंता और पूर्वाग्रह भी उजागर होती है.

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न्यूज़ नेटवर्क समूह प्रदेश 18 के अनुसार बर्मा के मुसलमानों से हमदर्दी जताते हुए प्रसिद्ध विद्वान और प्रख्यात मिल्ली रहनुमा मुफ्ती मह्फूजुर रहमान उस्मानी ने अपने विचोरों का व्यक्त किया है।

मुफ़्ती उस्मानी ने बर्मा में अत्याचार और निहत्थे मुसलमानों के नरसंहार और उन पर बुरे अत्याचार के अंतहीन सिलसिलों पर इस्लामी दुनिया की चुप्पी पर भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस्लामी देशों के संगठन (ओआईसी) संयुक्त राष्ट्र, मानव अधिकार की वैश्विक संस्थान और विश्व समुदाय बुधिष्टों की चरमपंथी पर अपनी चुप्पी कब तोड़ेगी और वहाँ के मज़लूम लुटे-पिटे और अपना घर बार छोड़ कर दुसरे देशों में शरण लिए भटक रहे मुसलमानों को इंसाफ कब मिलेगा?

उन्होंने कहा कि रखाईन राज्य में मुसलमानों का जन जीवन तितर-बितर कर दिया गया है, मर्दो, महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों सभी पर अत्याचार के पहाड़ तोड़े जा रहे हैं और वे पलायन को मजबूर हैं।

मुफ़्ती उस्मानी ने कहा कि ऐसे नाजुक हालात में मुस्लिम शासकों और वैश्विक संस्थाओं की चुप्पी अपराध के बराबर है। उन्होंने ने कहा कि ह्यूमन राइट्स वॉच ने जो उपग्रह तस्वीर जारी की है उसमें बताया गया है कि पिछले छह हफ्तों में रोहिंग्या मुसलमानों के सैकड़ों घर ध्वस्त कर दिए गए या उन्हें आग के हवाले कर दिया गया है।

म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों पर बुधवार को चरमपंथियों और बर्मा सैनिकों के अत्याचार ने सभी सीमाओं को पार कर दिया है। पिछले चार वर्षों से बुधिष्टों ने म्यांमार के अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुसलमानों पर अत्याचार, हत्या, लूटमार और महिलाओं की बलात्कार के कथित घटनाओं को अंजाम दिए हैं. बर्मा के सैनिकों ने मानवाधिकार को तार-तार कर दिया है और लगातार उल्लंघन हो रहा है इसके बावजूद पूरी दुनिया मूकदर्शक बनी हुई है।

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