Thursday , September 20 2018

रोहिंग्या मुस्लिमों के जनसंहार की रिपोर्टिंग पर दो पत्रकारों के ख़िलाफ़ मुक़द्दमा चलाने का आदेश

म्यांमार की अदालत ने ब्रिटिश समाचार पत्र राइटर्ज़ क दो पत्रकारों पर रोहिंग्या मुसलमानों के विरुद्ध जनसंहार की रिपोर्टिंग के दौरान राज़दारी बरतने के देश के क़ानून के उल्लंघन पर मुक़द्दमा चलाने का आदेश दे दिया।

फ़्रांसीसी समाचार एजेन्सी एएफ़पी की रिपोर्ट के अनुसार उक्त फ़ैसले के दिन को देश के इतिहासस में स्वतंत्र पत्रकारिता का काला दिन क़रार दिया जा रहा है।

ज्ञात रहे कि म्यांमार के नागरिक पतर्कार 32 वर्षीय वा लून  और 28 वर्षीय यासूई ओ को दिसम्बर 2017 में गिरफ़्तार किया गया था और उन पर आरोप लगाया था कि उनके पास राख़ीन प्रांत में सुरक्षा बलों की कार्यवाही के बारे में संवेदनशील हस्तावेज़ थे।

दोनों पत्रकार आधिकारिक रूप से मुक़द्दमा चलने से सात महीना पहले ही हिरासत में हैं जिन्हें म्यांमार के राज़दारी बरतने के क़ानून के अंतर्गत गिरफ़्तार किया था।

इस संबंध में मुक़द्दमे की पहली सुनवाई के लिए 16 जुलाई की तारीख़ निर्धारित की गयी, दोनों पत्रकारों पर यदि आरोप सिद्ध हो गये तो अंग्रेज़ दौर के बने क़ानून के अंतर्गत उन्हें 14 साल तक की सज़ा हो सकती है।

इस हवाले से समाचार एजेन्सी का कहना था कि दोनों पत्रकार निर्दोष हैं और वह सितम्बर में रोहिंग्या मुसलमानों के विरुद्ध होने वाले जनसंहार की रिपोर्टिंग करके केवल अपनी पत्रकारिता का दायित्व निभा रहे थे, संस्था ने अदालत पर बल दिया है कि दोनों पत्रकारों के विरुद्ध मुक़द्दमा ख़ारिज किया जाए किन्तु इस हवाले से अदालत ने फ़ैसला किया है कि पत्रकारों के विरुद्ध इस प्रकार के आरोप के काफ़ी प्रमाण मौजूद हैं कि वह सरकारी अधिकारियों से जानकारियां एकत्रित कर रहे थे।

दूसरी ओर पत्रकारों के विरुद्ध अदालती आदेश को दक्षिणपंथी संगठनों और विदेशी पर्यवेक्षकों की ओर से आलोचना का निशाना बनाया गया और उसे पत्रकारिता की स्वतंत्रता के विरुद्ध क़रार दिया गया जबकि इसे रोहिंग्या संकट की रिपोर्टिंग को रोकने के समान देखा जा रहा है।

उधर एमेनेस्टी इन्टरनेश्नल, ह्यूमन राइट्स वॉच और स्वतंत्र प्रमाणों के संगठन आर्टिकल 19 ने इस कार्यवाही को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंटने का प्रयास क़रार दिया है।

TOPPOPULARRECENT