Saturday , December 16 2017

रो पड़े आडवाणी

15 वीं लोकसभा के आखिरी दिन जब रुखसती का वक्त आया तो बीजेपी के सीनीयर लीडर लालकृष्ण आडवाणी जज़्बाती हो गए | मुश्किल से उन्होंने अपने सुओं को संभाला |

15 वीं लोकसभा के आखिरी दिन जब रुखसती का वक्त आया तो बीजेपी के सीनीयर लीडर लालकृष्ण आडवाणी जज़्बाती हो गए | मुश्किल से उन्होंने अपने सुओं को संभाला |

दरअसल, आखिरी दिन तकरीर के दौरान मुलायम ने आडवाणी की तारीफ की तो सीपीएम लीडर बासुदेव आचार्य ने भी उन्हें फादर ऑफ हाउस कहा जिससे आडवाणी जज़्बाती हो गये |

आडवाणी पार्लियामेंट के सिनीयर लीडरो में से हैं वे 1971 में पहली बार एमपी बने | पेचीदा मुद्दों की समझ और उन्हें सुलझाने के तरीकों को लेकर हर कोई आडवाणी का लोहा मानता है |

आखिरी दिन जब सीपीएम लीडर बासुदेव आचार्य ने जैसे ही उन्हें फादर ऑफ हाउस कहा इसके बाद आडवाणी की तारीफ करने वालों का तांता लग गया कांग्रेस लीडर सुशील कुमार शिंदे भी इस कतार में लग गए | एक तरफ तारीफ हो रही थी तो दूसरी तरफ आडवाणी बड़ी मुश्किल से अपने आंसू रोके हुए थे | हालांकि उनके चेहरे के हावभाव ने सबकुछ बयान कर दिया |

वैसे, पंद्रहवीं लोकसभा को तारीख याद रखेगा इसलिए कि इसमें रिकॉर्ड हंगामा हुआ लेकिन लोकसभा के आखिरी दिन जब रुखसती का वक्त आया तो रूलिंग पार्टी और अपोजिशन पार्टी ऐसे मिले और बैठे जैसे कुछ हुआ ही ना हो |

लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार के चेहरे की मुस्कान बताती रही की 15वीं लोकसभा का आखिरी दिन कितना सुकून भरा रहा आखिरी दिन हंगामा हुआ तो जरूर लेकिन ऐवानको मुल्तवी नहीं करना पड़ा. हंगामा करने वाले एमपी चाहे बिहार के रहे हों, तमिलनाडु के या फिर यूपी के |

हंगामा तो सबने किया लेकिन ऐवान मुल्तवी कराने की खाहिश किसी की नहीं दिखी वहीं स्पीकर की आखिरी तकरीर पूरा दर्द बयान कर गया | मीरा कुमार ने इस बात पर अफसोस ज़ाहिर किया कि पिछले लोकसभाओं के मुकाबले 15वीं लोकसभा के दौरान बहुत कम काम हुआ और कई गैर मुतावक्के और गैर जरूरी वाकियात ने ऐवान के हमवार कार्रवाई और कामकाज को अपाहिज कर दिया \

वज़ीर ए आज़म भी जानते थे कि विदाई की बेला है, लेकिन वो आपसी सियासी तकरार भुलाकर ऐवान की पीठ थपथपाने में पीछे नहीं रहे | वज़ीर ए आज़म ने माना की इख्तेलाफ बहुत रहे लेकिन मुल्क की भलाई में सबने कोशिश की तो रास्ता निकला मनमोहन सिंह ने कहा कि तेलंगाना बिल के पास होने से इशारा मिलता है कि ये मुल्क मुश्किल फैसले ले सकता है | सिंह ने उम्मीद जतायी कि मुल्क को नये रास्तों पर आगे ले जाने के लिए आम इत्तेफाक़ की एक नयी एहसास उभरी है |

साथ ही कहा कि इस कहासुनी और तनाव वाले माहौल से उम्मीद का एक नया माहौल उभरेगा |

अपोजिशन की बारी आई तो उन्होंने खरी-खरी ही सुना डाली सुषमा स्वराज ने कहा कि ये बेजाब्तगियो (Inconsistencies) से भरी लोकसभा रही जिसमें सबसे ज्यादा कामो में रुकावटें आईं | वहीं सबसे ज्यादा अहम बिल भी पास हुए | सुषमा ने चुटकी भी ली कि कमलनाथ अपनी शरारतों से कई बार ऐवान में मामला उलझाते तो शिंदे अपनी शराफत से उसे सुलझाते|

इसमें सोनिया की शालशी (Mediation) और आडवाणी के इंसाफ से ऐवान आसानी से चला| अपोजिशन लीडर ने हुकूमत को होशियार भी किया कि हम मुखालिफ हैं लेकिन दुश्मन नहीं |

मुलायम भी बुजुर्ग के किरदार में रहे कहा कि शख्त लफ्ज़ इस्तेमाल किये हैं तो ये हमारे किरदार का हिस्सा था | बीजेपी को नसीहत दी कि आडवाणी यहां सबसे बुजुर्ग लीडर हैं, उनको पीछे हटाया इसलिए बीजेपी की ताकत और घटती चली गई |

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