Wednesday , December 13 2017

लखनऊ जेल के मुस्लिम कैदी मज़हबी इम्तियाज़-ओ-बदसुलूकी के शिकार

दहशतगर्दी के मुक़द्दमात के ज़िमन ( जुर्म) में लखनऊ की जेल में महरूस मुस्लिम कैदियों के साथ जेल ओहदेदारों की जानिब से तलाशी मुहिम के नाम पर मुबय्यना तौर पर इमतियाज़ी सुलूक किया जाता है और मज़हबी बुनियाद पर बदसुलूकी का निशाना बनाया जा

दहशतगर्दी के मुक़द्दमात के ज़िमन ( जुर्म) में लखनऊ की जेल में महरूस मुस्लिम कैदियों के साथ जेल ओहदेदारों की जानिब से तलाशी मुहिम के नाम पर मुबय्यना तौर पर इमतियाज़ी सुलूक किया जाता है और मज़हबी बुनियाद पर बदसुलूकी का निशाना बनाया जाता है ।

मुस्लिम कैदियों के बैग्स चीर फाड़ के ज़रीया खोले जाते हैं। साज़-ओ-सामान को फेंका जाता है और फ़हश कलामी ( गंदी ज़बान) के साथ फ़िर्क़ा विराना मुनाफ़िरत पर मबनी ताने कसे जाते हैं । इसी ही शिकायात के शिकार एक मुस्लिम कैदी हकीम तारिक़ क़ासिमी ने अपने वुकला और रिश्तेदारों को बारह बनकी में उन के साथ पेश आए एक वाक़िया से वाक़िफ़ करवाया जहां उन्हें अदालत में पेशकशी के लिए लाया गया था ।

उन के साथ 10 दिन क़बल ये वाक़िया पेश आया था । हकीम तारिक़ क़ासिमी के वकील मुहम्मद शेब ने कहा कि 10 दिन क़बल लखनऊ जेल में उन के मुवक्किल का बैग खोला गया । इस में मौजूद अशिया को हर तरफ़ फेंक दिया गया और उन से बद कलामी की गई । जेलर और उन के नायब ने ये तलाशी ली थी।

मुहम्मद शोएब ऐडवोकेट ने कहा कि लखनऊ जेल के सख़्त तरीन सिक्योरिटी वाली इस कोठरी में जहां 32 मुसलमानों को दहशतगर्द होने के शुबा पर रखा गया है जिन से वक़फ़ा वक़फ़ा से ना सिर्फ बदसुलूकी और बदकलामी की जाती है बल्की उन्हें खाने के लिए नाक़िस ग़िज़ा और पीने के लिए गंदा पानी दिया जाता है ।

प्लेट को इस तरह ढकेला जाता है जैसे किसी जानवर को चारा डाला जाता है । रमज़ान के दौरान उन्हें दिन में खाना नहीं दिया जा रहा है । अलबत्ता इफ़तार के वक़्त मौज़ के दो छोटे टुकड़े , दो खजूर और दो पार्ले जी बिस्कुट्स दीए जाते हैं। उन्हें ज़बरदस्ती गंदा पानी पीने केलिए मजबूर किया जा रहा है ।

हकीम तारिक़ क़ासिमी को दिसम्बर 2007 में आज़मगढ़ से गिरफ़्तार किया गया था । उन के चचा ख़ालिद मुजाहिद को 16 दिसम्बर को जौनपूर के मुदी याहू बाज़ार से गिरफ़्तार किया गया था । उत्तरप्रदेश ए टी एस ने इन दोनों को बारह बनकी की अदालत में पेश किया था । उत्तर प्रदेश के मुख़्तलिफ़ अज़ला ( जिलो) में हुए सिलसिला वार धमाकों के ज़िमन में इन दोनों की गिरफ़्तारी अमल में आई थी ।

ग़लत इल्ज़ामात के तहत बेक़सूर मुसलमानों की गिरफ्तारियों के ख़िलाफ़ बड़े पैमाना पर एहतिजाज के बाद साबिक़ मायावती हुकूमत हक़ायक़ का पता चलाने के लिए आर डी निमेश कमीशन तशकील दी थी लेकिन इस कमीशन ने ताहाल रिपोर्ट पेश नहीं की है।

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