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लखनऊ:105 साल के इतिहास मे KGMU के मेडिसिन डिपार्टमेंट के पहले मुस्लिम प्रोफेसर

imageआउटलुक की रैंकिंग में हिन्दुस्तान की पांचवीं नंबर की मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी की तारीख़ के 105 साल में मेडिसिन डिपार्टमेंट के पहले मुसलमान प्रोफेसर डॉ कौसर उस्मान साहब से हमने मुलाक़ात की . गोरखपुर से ताल्लुक़ रखने वाले डॉ उस्मान MBBS की पढ़ाई करने के लिए लखनऊ आये, बाद में उन्होंने MD की डिग्री भी यहीं से हासिल की. पिछले पच्चीस साल से लखनऊ में रहने वाले डॉ उस्मान ने कुछ महीने अलीगढ में भी पढ़ाया लेकिन वहाँ उन्हें लखनऊ सी ख़ुशी ना मिली और वो फिर यहीं आ गए. जॉन एलिया की शाइरी के शौक़ीन डॉ उस्मान साहब से हमारी एक मुलाक़ात

सवाल: आप यहीं के रहने वाले हैं ?
डॉ उस्मान: नहीं, मैं गोरखपुर का रहने वाला हूँ लेकिन पिछले पच्चीस साल से लखनऊ ही में हूँ, समझिये MBBS करने मैं यहाँ आया तब से यहीं हूँ… कुछ महीने मैंने अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भी पढ़ाया है लेकिन फिर मैं यहीं आ गया.

सवाल: 105 साल में डिपार्टमेंट के पहले मुस्लिम प्रोफेसर, ख़ुशी होती है ?
डॉ उस्मान: ख़ुशी होती है लेकिन अफ़सोस भी होता है… अफ़सोस होता है कि पहले और क्यूँ नहीं हुए.

सवाल: मुसलमानों के पीछे रहने के पीछे क्या वजह मानते हैं ?
डॉ उस्मान: मज़हबी और सियासी रहनुमाओ ने अपनी ज़िम्मेदारी को ठीक से नहीं निभाया है, उन्होंने एक नेगेटिव attitude तय्यार किया है, ऐसा नहीं होना चाहिए जिसकी वजह से मुसलमान पीछे हो गया है.
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सवाल: मुसलमानों को आगे लाने के लिए क्या करना चाहिए ?
डॉ उस्मान : हमें दौर-ए-हाज़िर के में बेहतर काम करने वाले मुसलमानों के बारे में अपनी क़ौम से बताना चाहिए. ब्रिगेडियर उस्मान हिन्दुस्तान के लिए किसी जंग में शहीद होने वाले पहले बड़े अफ़सर थे, 1948 की पाकिस्तान से हुई जंग में शहीद हो गए लेकिन हम ये बातें लोगों से बता ही नहीं रहे हैं . मेरा कहना ये है कि कंटेम्पररी रोले मॉडल चाहिए हमें, आज का मुसलमान किसके नक्शेक़दम पर चले ?, तमाम मुसलमानों ने देश-ओ- दुनिया के लिए बेहतरीन काम किया है लेकिन हम उन्हें रोल मॉडल नहीं बना रहे हैं. तरक्क़ी पसंद होना बहुत ज़रूरी है.मुसलमान को साधारण से बेहतर बनना होगा. साधारण मुसलमान के लिए बड़ी मुश्किलात हैं, आप को “above average” होना ही होगा.

सवाल: क्या आप पिछले सालों में कोई बदलाव देखते हैं ?
डॉ उस्मान: पिछले दो तीन दशकों में काफ़ी बदलाव आया है, पहले जहां सिर्फ़ 2-4 ही मुसलमान किसी बैच में होते थे अब 20-25 होते हैं, इस लिहाज़ से देखें तो एनरोलमेंट बढ़ा हैं. वैसे एक बात ज़रूर है, मुसलमानों में यूं तो कई एक बुराइयां हैं लेकिन मुसलमान भ्रष्टाचार से बहुत दूर है तो अगर मुसलमान सरकारी नौकरियों में आते हैं तो इससे देश का भी बहुत भला होगा ..

सवाल: आपको 2014 में बेस्ट टीचर का ख़िताब भी दिया गया, एक टीचर में क्या बातें होनी चाहियें?
डॉ उस्मान: एक अच्छा टीचर होने के लिए मेरे ख़याल से तीन बातें होनी चाहियें, एक तो ये कि सब्जेक्ट पे अच्छी पकड़ होना चाहिए, दूसरी बात ज़बान पे पकड़ होनी चाहिए और तीसरी बात है कम्युनिकेशन, कम्युनिकेशन स्किल्स बहुत अच्छी होनी चाहिए. ये तीन बातें मेरे ख़याल में एक अच्छा टीचर होने के लिए ज़रूरी हैं .

सवाल: हिन्दुस्तान के ऐतबार से देखें तो क्या बदलाव देखते हैं आप मेडिसिन की दुनिया में ?
डॉ उस्मान : पिछले 20-30 साल में हिन्दुस्तान ने मेडिसिन-सेहत की दुनिया में बहुत तरक्क़ी की है. पूरी दुनिया में हमने इस फील्ड में अपनी पहचान बनायी है. हर साल देश भर में कुल 250000 मरीज़ आते हैं, मेडिकल टूरिज्म बढ़ा है और आज ये 3 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया है, अगले चार सालों में ये 8 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाने की उम्मीद है.

सवाल: ज़्यादतर मरीज़ किन देशों से आते हैं ?
डॉ उस्मान : गल्फ़, अमेरिका और अफ्रीका

सवाल:पहले और अब में बीमारियों में कोई बदलाव आया है ?
डॉ उस्मान : पिछले दिनों बीमारियाँ बदली हैं, पहले की तुलना में ब्लड प्रेशर, डाईबिटिक और दिल की बीमारियाँ बढ़ी हैं, जहां ये बीमारियाँ पहले शहरो तक ही थीं, अब ये गाँव में भी आ गयी हैं. आज कल की बीमारियाँ महंगी भी हैं. इन बीमारियों का सही इलाज इन बीमारियों से बचाव है.

सवाल: महंगे इलाज के लिए हुकूमत को क्या करना चाहिए ?
डॉ उस्मान: ग़रीबों के लिए हुकूमत को अलग से काम करना चाहिए, सस्ती मेडिकल सर्विसेज देनी चाहिये जैसे राईट तो एजुकेशन है वैसे ही राईट तो हेल्थ भी होना चाहिए. MNCs तो पैसा कमा रही हैं लेकिन आम लोगों का क्या ? इसलिए राईट तो हेल्थ भी होना चाहिए, सेपरेट मॉडल फ़ॉर poor होना चाहिए

सवाल: क्या आपको अस्पतालों की कमी महसूस होती है ?
डॉ उस्मान: जी बिलकुल, अब देखिये प्रदेश भर के लोग यहाँ इलाज कराने आते हैं इससे हॉस्पिटल पे भी प्रेशर पड़ता है और मरीज़ों को भी इससे परेशानी होती है… छोटे शहरों और बैकवर्ड एरियाज में हॉस्पिटल और खुलने चाहियें.. तमाम मरीज़ तो ट्रांसपोर्टेशन की वजह से मर जाते हैं ,वो अस्पताल तक पहुँच ही नहीं पाते.

सवाल: इधर मेडिसिन की फील्ड में कोई ऐसा डेवलपमेंट जो आपको लगता हो कि क्रांतिकारी है ?
डॉ उस्मान: नहीं ऐसा तो कोई डेवलपमेंट नहीं हुआ है, चीज़ें मॉडिफाई हुई हैं, इम्प्रूवमेंट हुआ है लेकिन करिश्माई कुछ भी नहीं हुआ है..

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