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लडकियों से डरने लगे हैं फारूख अब्दुल्लाह?

जम्मू - कश्मीर के साबिक़ वज़ीर-ए-आला और मर्कज़ी वज़ीर फ़ारूक़ अबदुल्लाह को आजकल लड़की से बात करने में भी डर लगने लगा है ।

जम्मू – कश्मीर के साबिक़ वज़ीर-ए-आला और मर्कज़ी वज़ीर फ़ारूक़ अबदुल्लाह को आजकल लड़की से बात करने में भी डर लगने लगा है ।

फ़ारूक़ अबदुल्लाह इस तरह के एक बयान से तनाजे में घिर गये हैं। फ़ारूक़ अबदुल्लाह से जब जस्टिस गांगुली मुआमले में राय तलब की गई तो उन्होंने कहा, अब तो ये हालत हो गई है कि आजकल लड़की से बात करने में भी डर लगने लगा है, बल्कि हम तो समझते हैं कि हम में से अब किसी को लड़की सेक्रेटरी ही नहीं रखनी है। ख़ुदा – ना – ख़ास्ता हमारे ख़िलाफ़ शिकायत ना हो जाये और हम ही जेल ना पहुंच जाएं। हालत ऐसी हो गई है। मैं मानता हूँ कि हिंदुस्तान में रेप बढ़ गए हैं। ऐसी बात नहीं है कि ऐसा नहीं है, मगर कहीं तो कोई रुकावट होना चाहीए।..हालांकि इस बयान पर तनाजा ब़ढते देख उन्होंने माफी भी मांग ली है।

जब एक सहाफ़ी ने फ़ारूक़ अबदुल्लाह से पूछा कि क्या आप लड़कियों को इस के लिए ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं तो उन्होंने फ़ोरा अपनी सर बदल दिए और कहा, …नहीं, मेैं लड़कियों को ज़िम्मेदार नहीं ठहरा रहा हूँ. मैं इसके लिए समाज को ज़िम्मेदार ठहरा रहा हूँ। समाज ऐसी हालत में है कि अब एक तरफ़ से दूसरी तरफ़ को दबाव बढ़ने लगा है। अफ़सोस इस बात का है कि पहले तो रेप होना ही नहीं चाहिए . लेकिन हिंदुस्तान में ऐसे वाक़ियात बढ़ गए हैं, क्योंकि औरतों की तादाद में कमी आई है, घर में अगर लड़का पैदा होता है तो हम ख़ुश होते हैं। वहीं लड़की के होने रोने लगते हैं, जबकि लड़कियों का भी समाज में होना बहुत ज़रूरी है।

बयान पर हंगामा होने पर फ़ारूक़ अबदुल्लाह ने माफ़ी मांग ली है, उन्होंने सवाल पूछ रहे सहाफ़ियों से ये भी कहा, आप लोग सब का बेड़ा ग़र्क़ करोगे। अरे मैं तो कई तरह की हलकी फुलकी बात करता हूँ। ये मेरे लिए नई बात नहीं है।

इससे पहले फ़ारूक़ के बेटे और जम्मू – कश्मीर के वज़ीर-ए-आला उमर अबदुल्लाह ने उम्मीद ज़ाहिर की थी कि उनके पापा इस बयान के लिए माफ़ी मागेंगे।

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