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लद्दाख में ताज़ा तरीन दरअंदाज़ी की चीनी मुदाफ़अत

बीजिंग 10 जुलाई (पी टी आई) लद्दाख में चुमार सैक्टर में पीपल्ज़ लिबरेशन आर्मी की ताज़ा तरीन दरअंदाज़ी का अमली तौर पर दिफ़ा करते हुए चीन ने आज कहा कि इस के फ़ौजी ख़ित्ता क़बज़ा की दूसरी जानिब चीनी सरज़मीन पर तिल्ला ये गर्दी कररहे थे।

बीजिंग 10 जुलाई (पी टी आई) लद्दाख में चुमार सैक्टर में पीपल्ज़ लिबरेशन आर्मी की ताज़ा तरीन दरअंदाज़ी का अमली तौर पर दिफ़ा करते हुए चीन ने आज कहा कि इस के फ़ौजी ख़ित्ता क़बज़ा की दूसरी जानिब चीनी सरज़मीन पर तिल्ला ये गर्दी कररहे थे।

चीन ने कहा कि क़तई फ़ैसला तक जूं की तूं हालत में कोई तबदीली नहीं की जानी चाहीए। वज़ीर-ए-दिफ़ा ए के एंटोनी के गुज़िश्ता हफ़्ता दौरा-ए-चीन के बाद प्रैस कान्फ़्रैंस से ख़िताब करते हुए चीनी वज़ारत-ए-ख़ारजा के तर्जुमान हवाचन अंग ने कहा कि वो मुताल्लिक़ा ख़बरों का जायज़ा ले चुके हैं लेकिन मख़सूस सूरत-ए-हाल से वाक़िफ़ नहीं हैं।

तर्जुमान ने कहा कि सरहदी इलाक़े की सूरत-ए-हाल मुस्तहकम है। हम में इत्तिफ़ाक़ राय पाया जाता है कि सरहद के मसले की क़तई यकसूई तक हिन्दुस्तान और चीन दोनों में से किसी को भी ख़त हक़ीक़ी क़बज़े पर जूं की तूं सूरत-ए-हाल बरक़रार रखनी चाहीए।

वो बिलवासता तौर पर ये कहना चाहती थीं कि इन्फ्रास्ट्रक्चर में किसी भी किस्म की तबदीली ना की जाये। उन्होंने कहा कि चीन हिन्दुस्तान के साथ सरहदी इलाक़े में अमन और ख़ैरसिगाली की बहाली के लिए मुशतर्का जद्द-ओ-जहद करेगा।

17 जून को पीपल्ज़ लिबरेशन आर्मी के फ़ौजीयों ने लद्दाख के चुमार सैक्टर में दरअंदाज़ी की थी। चंद तहा ख़ाने तबाह करदिए थे और हिन्दुस्तानी सरहदी चौकी पर नसब कैमरों के तार मुनक़ते करदिए थे।

एटोनी ने वज़ीर-ए-आज़म चीन के साथ सरहदी मसले पर बातचीत की थी और उनसे पहले 28 और 29 जून को मुशीर क़ौमी सलामती शिव शंकर मेनन भी सरहदी मसले पर तबादला-ए-ख़्याल करचुके हैं। इमकान है कि हिन्दुस्तान चीन के बयान पर सरहदी इलाक़े में इन्फ्रास्ट्रक्चर में कोई तबदीली ना करने की तजवीज़ को मुस्तर्द करदेगा।

हिन्दुस्तान ने कहा कि सरहदी मुआहिदे का मक़सद दोनों ममालिक के दरमियान सरहदी इलाक़े में इश्तिआल अंगेज़ी से गुरेज़ है। मुतनाज़ा ख़ित्ता हक़ीक़ी क़बज़े पर दोनों जानिब से तिल्ला ये गर्दी की जाये और किसी भी हालत में एक दूसरे पर फायरिंग ना की जाये ।

इन्फ्रास्ट्रक्चर में किसी भी तबदीली ना करने की तजवीज़ हिन्दुस्तान के लिए नाक़ाबिल-ए-क़बूल है।

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