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लद्दाख में लगने वाले विश्व के सबसे बड़े टेलीस्कोप की मेजबानी भारत से छिनी

photo Courtesy-NDTV

नई दिल्ली: भारत ने विश्व के सबसे बड़े टेलीस्कोप की मेजबानी करने का मौक़ा भारत ने गवां दिया है| 30 मीटर के विशालकाय टेलीस्कोप (टीएमटी) को जम्मू-कश्मीर के लद्दाख में अत्यधिक ऊंचाई का सुदूर स्थान दिये जाने की बात को लेकर भारी कयास लगाए जा रहे थे|
एनडीटीवी की खबर के मुताबिक़ यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पसंदीदा परियोजना थी| टीएमटी परियोजना को राजग की ओर से समर्थन पीएम के पद संभालने के चार माह के भीतर मिला था | पहली बड़ी विज्ञान परियोजनाओं में से एक थी जो पीएम मोदी के मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई थी |

इस का खास मक़सद ब्रह्मांड की उत्पत्ति और गुप्त ऊर्जा का अध्ययन करना है. भारत सरकार की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ वैज्ञानिक ब्रह्मांड में धरती से बेहद दूर के पिंडों का अध्ययन वैज्ञानिकों द्वारा टीएमटी के जरिए किया जा सकेगा | इससे ब्रह्मांड के विकास के शुरुआती चरणों के बारे में, पास के पिंडों के बारे में भी अच्छी जानकारी मिलेगी | ये पिंड सौर मंडल के वे ग्रह या पिंड हैं, जिन्हें अब तक नहीं खोजा जा सका है | इनमें अन्य तारों के आसपास के ग्रह भी शामिल हैं. वर्ष 2024 में टीएमटी से कम्पीटिशन करने वाले 39 मीटर व्यास के ‘यूरोपियन एक्सट्रीमली लार्ज टेलीस्कोप’ के चिली में स्थापित होने की संभावना है |

उत्तरी गोलार्ध के सबसे बड़े प्रकाशीय और अवरक्त दूरदर्शी टीएमटी की मदद से कई खोजें हो सकेंगी. हवाई में 4050 मीटर ऊंचे पर्वत मौउना कीया टीएमटी को स्थापित करने की पसंदीदा जगह थी | लेकिन वहां (हवाई) के स्थानीय लोगों ने इसके ख़िलाफ़ स्थानीय अदालतों में याचिकाएं डाली गईं थीं | लोगों के मुताबिक़ टेलीस्कोप के निर्माण ने एक ‘पवित्र स्थल’ का उल्लंघन किया है |
वर्ष 2015 में वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय की इच्छाओं के विपरीत अदालत के आदेश के चलते हवाई में टेलीस्कोप के निर्माण को रोक दिया गया | इसके कारण भारी अनिश्चितता पैदा हो जाने पर बेहतर वैकल्पिक स्थान की तलाश शुरू हो गई | भारत में हिमालय के अत्यधिक ठंडे क्षेत्र में 4500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हानले पर गंभीरता से विचार किया गया | भारत स्थित हानले में, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजीक्स (आईआईएपी), बेंगलुरु द्वारा संचालित विश्व का सबसे ऊंचा प्रकाशीय टेलीस्कोप पहले से मौजूद है |

अमेरिका के हवाई स्थित मौउना कीया में टीएमटी परियोजना में भारत की भागीदारी के लिए 24 सितंबर, 2014 को पीएम मोदी की अध्यक्षता वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अपनी मंजूरी दी थी | इसपर वर्ष 2014-23 तक 1299.8 करोड़ रुपए का खर्च आएगा. सरकार के मुताबिक़ अमेरिका, कनाडा, जापान, भारत और चीन के संस्थानों वाले एक अंतरराष्ट्रीय संघ द्वारा 1.47 अरब की लागत से टीएमटी का निर्माण किया जाएगा | भारतीय पक्ष की ओर से यह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और परमाणु उर्जा विभाग की संयुक्त परियोजना होगी | भारत की साझेदारी अपने योगदान के आधार पर 10 प्रतिशत की होगी |

इससे भारतीय वैज्ञानिकों को आधुनिक विज्ञान के कुछ बेहद मूलभूत सवालों के जवाब पाने के लिए अत्याधुनिक टेलीस्कोप का इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा| इसके तहत भारतीय वैज्ञानिक प्रति वर्ष 25 से 30 रातों के लिए अवलोकन करेंगे |

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