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लव जिहाद हिंदू समाज और देश के लिए खतरा : विश्व हिंदू परिषद

नई दिल्ली: जयपुर के आध्यात्मिक मेले में विश्व हिंदू परिषद द्वारा वितरित लव जिहाद संबंधित साहित्य पर जिस तरह की आपत्ति सेकुलर बिरादरी ने व्यक्त की है उससे उनकी हिंदू विरोधी मानसिकता स्पष्ट हो जाती है| विश्व हिंदू परिषद के संयुक्त महामंत्री डॉ सुरेंद्र जैन ने  कहा है कि आज पूरा विश्व लव जिहाद के षड्यंत्र पर चिंता व्यक्त कर रहा है।

पश्चिम में इसे रोमियो जिहाद कहा जाता है। भारत में भी लव जेहाद नाम केरल उच्च न्यायालय ने दिया है। ऐसे ही एक मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर इस सेकुलर बिरादरी को अवश्य बताने चाहिए। उन्होंने पूछा कि “केवल हिंदू लड़कियां ही मुस्लिम लड़कों से शादी क्यों करती हैं? मुस्लिम लड़कियां हिंदू लड़कों से क्यों नहीं? ऐसी शादी के बाद क्यों केवल हिंदू लड़कियां ही धर्म परिवर्तन करती हैं, मुस्लिम लड़के क्यों नहीं? ऐसी शादी के बाद क्यों कई लड़कियां ढूंढने पर भी नहीं मिलती?”

केरल कर्नाटक के बाद अब पूरे देश में इस तरह के हजारों उदाहरण सामने आ चुके हैं बहुत मामलों में तो हिंदू लड़कियों ने स्वयं प्रेस के सामने उपस्थित होकर अपने उत्पीड़न की पीड़ा को व्यक्त किया है। मुंबई की एक मॉडल ने तो अभी हाल ही TV पर आकर आपबीती बताई थी। कई बार पकड़े गए कुछ अपराधियों ने तो स्वीकार भी किया है कि वे इन गैर मुस्लिम लड़कियों को एक षड्यंत्र के अंतर्गत ही फसाते हैं जिसके लिए उन्हें पैसा मिलता है। इन सब तथ्यों के बावजूद सेकुलर बिरादरी, हिन्दुओं द्वारा देश की रक्षा के लिए चलाये जा रहे, इस जागरण अभियान को, कैसे अपमानित कर सकती हैं?

डा. जैन ने कहा कि भारत में तो लव जिहाद का एक नया आयाम सामने आ रहा है। बहकाई गयी कई लड़कियों को आतंकवादियों के पास भेजा जा रहा है। केरल में पहले एक पीड़ित पिता द्वारा गुहार लगाई गई थी, अब एक मां ने भी अदालत में अपील करके अपनी बेटी को बचाने की मांग की है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय को इन मामलों की जांच एनआईए को सौंपनी पड़ी। केरल से गायब हुई कई लड़कियों को आतंकी संगठनों में भर्ती करने का अंदेशा समाज के कई वर्गों को है। आज लव जिहाद राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा बन चुका है।

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री विनोद बंसल द्वारा आज जारी इस बयान में डा जैन ने यह भी कहा कि भारत के कई स्थानों पर इन षड्यंत्रों के कारण भीषण असंतोष पनप रहा है। लद्दाख में कई वर्षों से जिहादियों के द्वारा चल रहे इस षड्यंत्र को अब चरम सीमा पर पहुंचाया जा चुका है। इसलिए पिछले दिनों कई बौद्धों ने कुछ जिहादियों की पिटाई भीकी। पड़ोसी देश श्रीलंका में भी इसी कारण मुस्लिमों और बौद्धों में झड़पों के समाचार आ रहे हैं। म्यानमार में रोहिंग्याओं के साथ संघर्ष के मूल में भी लव जिहाद की ही घटनाएं थी।अब समय आ गया है की इस षड्यंत्र को सेकुलरिज्म की आड़ में छिपाने की जगह उजागर किया जाए और गैर मुस्लिमों को सावधान किया जाए। कश्मीर के उदाहरण से सब को सबक सीखना चाहिए।

मुस्लिम समाज को म्यानमार से पाठ सीखना होगा। लद्दाख व श्रीलंका में शुरुआत हो चुकी है। जिहादियों के पापों को सेकुलर बिरादरी कितना भी छुपा ले पीड़ित समाज एक सीमा के बाद प्रतिकार करेगा ही। इससे सौहार्द तो समाप्त होगा ही, सह अस्तित्व के लिए भी संकट निर्माण होगा। उन्हें जेहाद के हर रूप से तौबा करनी होगी तथा गैर मुस्लिमों के साथ प्रेम से रहना सीखना होगा।

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