Tuesday , December 12 2017

ल़डकी की जासूसी- जांच को तैयार नहीं हैं जज ?

गुजरात में एक लड़की की जासूसी करने के वाक़िये की तहक़ीक़ात के ऐलान को एक महीना हो चुका है, इसके बाद अभी तक हुकूमत उस की तफ़तीश करने वाले अदालती कमीशन की सरबराही करने के लिए किसी रिटायर्ड जस्टिस का नाम तय नहीं कर पाई है।

गुजरात में एक लड़की की जासूसी करने के वाक़िये की तहक़ीक़ात के ऐलान को एक महीना हो चुका है, इसके बाद अभी तक हुकूमत उस की तफ़तीश करने वाले अदालती कमीशन की सरबराही करने के लिए किसी रिटायर्ड जस्टिस का नाम तय नहीं कर पाई है।

गुजरात के वज़ीर-ए-आला और वज़ीर-ए-आज़म के ओहदे के बी जे पी के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी इस मुआमले में मुबय्यना तौर पर मुंसलिक हैं। सरकारी ज़राए ने कहा कि हुकूमत ने इस सिलसिले में कुछ जजों से राबिता किया था, लेकिन तमाम लोगों ने मुबय्यना तौर पर उसे इंतिहाई सियासी क़रार देते हुए पेशकश क़बूल करने से इनकार कर दिया। ज़राए ने बताया कि मोदी वज़ीर-ए-आज़म के ओहदे के उम्मीदवार हैं और लोकसभा इलेक्शन सिर पर हैं, ऐसे में हुकूमत उसकी तफ़तीश की सरबराही करने की रजामंदी ज़ाहिर करने वाला कोई जज नहीं पा सकी है।

मर्कज़ी वज़ीर-ए-दाख़िला सुशील कुमार शिंदे ने इससे इनकार किया है कि तहक़ीक़ात की सरबराही करने पर रजामंदी ज़ाहिर करने वाला कोई जज नहीं है, लेकिन साथ ही कहा कि रिटायर्ड जस्टिस के नाम के ऐलान में कुछ मसला हैं। शिंदे ने 10 जनवरी को ऐलान किया था कि अदालती कमीशन की सरबराही के लिए किसी जज के नाम का ऐलान एक – दो दिन में कर दिया जाएगा, लेकिन इस ऐलान के नौ दिन बाद भी किसी जज के नाम का ऐलान नहीं हुआ है।

हुकूमत ने 26 दिसंबर को मुबय्यना तौर पर मोदी की तरफ़ से एक ख़ातून की जासूसी करने के मुआमले की जांच के लिए जांच कमीशन की तशकील का ऐलान किया था। मर्कज़ी काबीना ने जांच कमीशन ऐक्ट की दफ़ा 3 के तहत ये फ़ैसला किया था।

TOPPOPULARRECENT