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लालू कभी भी गिरफ्तार हो सकते हैं

पटना 13 जुलाई : चारा घोटाले में बुरी तरह से फंसे लालू प्रसाद यादव कभी भी गिरफ्तार हो सकते हैं। गिरफ्तारी के बाद जहां लालू अपनी ही पार्टी से दूर हो जाएंगे, वहीं अदालत मुजरिम करार दिए जाने पर वे सियासत की मेन स्ट्रीम से भी अलग हो जाएंगे

पटना 13 जुलाई : चारा घोटाले में बुरी तरह से फंसे लालू प्रसाद यादव कभी भी गिरफ्तार हो सकते हैं। गिरफ्तारी के बाद जहां लालू अपनी ही पार्टी से दूर हो जाएंगे, वहीं अदालत मुजरिम करार दिए जाने पर वे सियासत की मेन स्ट्रीम से भी अलग हो जाएंगे। लेकिन, लालू इस तरह के मामलों से निपटने की आदत हो चुकी हैं।

चारा घोटाला मामले में ही लालू जब जेल जाने लगे थे, तब उनकी पार्टी के कई बड़े लीडर वजीर ए आला बनने का ख्वाब देखने लगे थे। ऐसे में लालू ने सबको झटका देते हुए अपनी बीवी राबड़ी देवी को बिहार का सीएम बना दिया। पार्टी के अंदर होने वाला एहतेजाज एकदम से थम गया था। पशुपालन घोटाले में मुजरिम करार दिए जाने के बाद लालू यादव के साथ अब वैसा ही कुछ हाल फिर से हो गया है। ऐसे में कई तरह के कय्यास लगाए जा रहे हैं। बिहार में जब लालू अपनी बीवी को सियासत में लाए तब वे हुकूमत में थे, लेकिन फिलहाल हुकूमत उनके पास नहीं है।

बीवी या बेटी को सौंप सकते हैं कमान

लालू अपनी गिरफ्तारी के बाद बीवी राबड़ी देवी या फिर बेटी मिसा भारती को पार्टी का कमान सौंप सकते हैं। सारा कुछ ये दोनों पार्टी के बड़े कायेदिनों के साथ मिलकर करेंगी। बता दें कि लालू की रैली में मिसा भारती ने बढ़ चढ़कर हिस्सा ली थी। तब, मिसा भारती ने सियासत में कुनबा परवरी को फरोग दिए जाने की बात पर अपने वालिद का हिमायत भी की थी। मिसा ने कही थी कि इंजीनियर अपने बेटे को इंजीनियर बनाना चाहता है, डॉक्टर अपने बेटे को डॉक्टरी पढ़ाता है। अगर ऐसे में कोई सियासी लीडर अपने बच्चों को सियासत में लाता है तो इसमें क्या बुराई है।

बेटों को नहीं देंगे मौका

तब्दिली रैली में जिस तरह से लालू ने अपने बेटों को सामने लाने की कोशिश की थी, ऐसे में वे सियासत में एंट्री तो ले चुके हैं। लेकिन, जराए की मानें तो तेज और तेजस्वी को फिलहाल पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी ऐसा नहीं लगता है। जिस तरीके से उनके इत्तेहाद के साथी राम विलास पासवान अपने बेटे चिराग पासवान को फ्रंट पर ला रहे हैं, लालू के बेटों के साथ ऐसा होता हुआ नहीं दिखाई दे रहा है।

सीएम की रेस से खानदान को कर सकते हैं अलग

जेल जाने के बाद लालू यादव के लिए सबसे बड़ी मुसीबत पार्टी को मुत्तहिद करने की होगी। ऐसे में लालू वजीर ए आला के ओहदे से अपने खानदान को अलग कर सकते हैं। इससे पार्टी के सीनियर कायेदिनों में ये पैगाम जाएगा कि वे भी अगले सीएम बन सकते हैं। लालू के इस कदम से जहां सभी बड़े लीडर पार्टी को जीताने में एड़ी-चोटी का जोर लगा देंगे। वहीं, पार्टी के जीतने के साथ ही लालू फिर से बिहार की सियासत में अपना दबदबा बढ़ा सकते हैं।

लालू बने रहेंगे सदर

पशुपालन घोटाले में गिरफ्तारी की तलवार लालू पर लटक रही है। ऐसे में गिरफ्तारी के बाद भले ही वे इन्तेखाबात नहीं लड़ पाएं, लेकिन पार्टी सरबराह के ओहदे पर बने रहेंगे। वहीं, पार्टी का एक्सक्यूटिव सदर किसी बड़े लीडर को बना सकते हैं।

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