लालू के अहलेखना पर हमला मेरी सबसे बड़ी भूल : पप्पू

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शकुनी का इस्तीफ़ा, पप्पू बयान से पलटे, लालू-नीतीश के खिलाफ बोलने पर ज़ाहिर की अफ़सोस

पटना : बिहार इंतिख़ाब में जेडीयू-आरजेडी-कांग्रेस महागठबंधन की जीत की तपिश भाजपा के बाद अब एनडीए के साथी और दूसरे पार्टियों तक भी पहुंच रही है। साबिक़ वजीरे आला जीतनराम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्यूलर) के रियासती सदर शकुनी चैधरी ने अपने ओहदे से इस्तीफ़ा दे दिया है। शकुनी चैधरी और उनके बेटे राजेश कुमार दोनों को ही इंतिख़ाब में हार का सामना करना पड़ा था। जुमा को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस में शकुनी ने इस्तीफ़े के साथ फआल सियासत से रिटाइरमेंट लेने की भी एलान की। हालांकि जीतनराम मांझी ने इस्तीफ़ा नामंज़ूर करते हुए चौधरी से अपने फ़ैसले पर फिर से गौर करने को कहा है। वहीं हार के बाद लीडरों के सुर भी बदलने लगे हैं। एमपी और जनाधिकार पार्टी (सेकुलर) के पप्पू यादव ने एसेम्बली इंतिख़ाब तशहीर के दौरान कई इजलास में कहा था कि अगर लालू के दोनों बेटे इंतिख़ाब जीत गए तो वे सियासत से रिटाइरमेंट ले लेंगे।

लालू के दोनों बेटों के इंतिख़ाब जीतने के बाद पप्पू ने कल एक फ़ेसबुक पोस्ट में अपने कहे पर अफ़सोस ज़ाहिर की। पप्पू ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘यक़ीनी तौर पर मेरा यह दावा बिलावजह था। राजनेता के बेटे के सिलसिले में ऐसी बातें मुझे नहीं करनी चाहिए थीं। ’’ क्या रिटाइरमेंट से जुड़े सवालों से बचने के लिए आपने यह अफसोश जताया है? इस सवाल पर दिल्ली में पप्पू का जवाब था, ‘‘ये मेरे दिल की आवाज़ है। सियासत में जुबान की मर्यादा बची रहनी चाहिए। मैंने जो कहा वो इनसाई भूल थी.’’ ख़ुद एनडीए के लीडर हार की एक वजह यह बता रहे हैं कि एनडीए के पार्टी एक-दूसरे को अपना वोट ट्रांसफ़र नहीं करा सके।
भाजपा का वोट साथी पार्टियों को ट्रांसफ़र नहीं हुआ या साथी पार्टियों का भाजपा को? इस सवाल पर राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के रियासती सदर और एमपी अरुण कुमार ने बहुत ही सीधा जवाब दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘एनडीए के पार्टियों के कारकुनान के दरमियान बातचीत की कमी रही। इसके लिए भाजपा समेत एनडीए के तमाम पार्टी मुजरिम हैं। यह एक पॉलिसी बानाने वाले की हार है। ’’बिहार में एनडीए ख़ासकर भाजपा के साथी पार्टियों का मुस्तकबिल क्या है? पप्पू यादव की पार्टी कितने दिनों तक सियासी मैदान में टिकी रहेगी? इन इमकानात पर सीनियर रिपोर्टर सुरेंद्र मोहन बताते हैं, ‘‘मुझे लगता है कि मांझी और पप्पू की पार्टी चल नहीं पाएगी। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा का मुस्तकबिल भी अच्छा हो नहीं सकता। रामविलास पासवान अपनी पार्टी चला लेंगे। ’’

 

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