Tuesday , September 25 2018

लालू के बिहार बंद पर गरमायी सियासत

पटना : राजद सरबराह लालू प्रसाद नस्ली मरदम शुमारी रिपोर्ट जारी करने की मुतालिबात को लेकर पीर को सड़क पर उतरे। बिहार बंद के जरिये से उन्होंने सेंटर को पैगाम भेजा कि रिपोर्ट बिला ताखीर जारी हो। उन्होंने कहा कि बीजेपी के मन में खोट है। नरेंद्र मोदी छली हैं। एसेम्बली इंतिख़ाब के पहले मरकज़ हुकूमत को नस्ली मरदम शुमारी रिपोर्ट जारी करनी होगा। राजद सरबराह ने डाकबंगला चौराहा पर कहा कि मुल्क में सोना सस्ता हो रहा है जबिक दाल महंगी हो रही है। यह गरीबों के साथ नाइंसाफी नहीं तो क्या है। बीजेपी से कारोबार तबका भी परेशान हैं।

इसी की वजह से उनका हिमायत मिला है। गरीबों को हक देने पर बीजेपी वाले कहते हैं कि जंगलराज है। 84 साल के बाद जब नस्ली मरदम शुमारी हुई,तो रिपोर्ट जारी नहीं हो रही है। मोदी स्मार्ट सिटी की बात करते हैं। लोगों के लिए स्मार्ट गांव की जरूरत है। यह आजादी की दूसरी लड़ाई है। दलित,पसमानदा व ऊंची जाति के गरीबों के साथ नाइंसाफी हुई है।

मुखालिफत में सड़क पर निकले हैं। मोदी के मन में खोट है। वजीरे आला के डीएनए में खोट की बात करता है और बिहार के यादवों को गाली देकर बेइजति करने का काम कर रहा है। बिहार की अवाम समझ गयी है। यहां के लोग उड़ती चिड़िया को चूना लगाना जानते हैं। नरेंद्र मोदी को मालूम है कि नस्ली मरदम शुमारी रिपोर्ट जारी करने का नतीजा क्या होगा। उन्होंने बताया कि जद्दो-जहद के लिए अब आगे का प्रोग्राम मुकर्रर होगा।

बंद पूरी तरह से रहा कामयाब : तेजस्वी

राजद के नौजवान लीडर तेजस्वी यादव ने बताया कि बिहार बंद पूरी तरह से कामयाब रहा । राजद के लीडरों और कारकुनान ने तरीके से बंद को कामयाब बनाया। बंद से रेल, एंबुलेंस, स्कूल जैसे जरूरी सर्विस को बंद से बाहर रखा था। बंद का अहम मक़सद नस्ली मरदम शुमारी की रिपोर्ट को जारी कराना है।

मुल्क में एसटी एससी के नौजवानों की आबादी बढ़ गयी है। कानून के मुताबिक एससी व एसटी के नौजवानों को उनकी तादाद के रेशिओ में रिज़र्वेशन की तजवीज करना है। यह बात तो रिपोर्ट जारी होने के बाद ही साफ होगा। जब भी वजीर आजम मशरिक़ के रियासतों में आते है, तो अपने को पसमानदा का बेटा बताते हैं।

तो, अब वह पसमानदा लोगों का गला दबाने का काम क्यों कर रहे हैं। तेजस्वी के बड़े भाई तेज प्रताप यादव ने कहा कि पुरअमन बंद के लिए रियासत के रहने वालों को मुबारकबाद। बंद को कामयाब बनाने में सबसे ज़्यादा किरदार नौजवानों की दिख रही थी।

 

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