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लालू-नीतीश की दोस्‍ती का शुरुआती शो फ्लॉप

20 साल बाद आरजेडी सरबराह लालू प्रसाद यादव और जेडीयू लीडर नीतीश कुमार जब सियासी प्लेटफॉर्म पर साथ आए तो उनका जलवा फीका रहा। पीर को हाजीपुर और समस्तीपुर की उनकी इंतिख़ाबी रैलियों में कुछ सौ लोग ही नजर आएं। साथ ही प्लेटफॉर्म पर कांग्र

20 साल बाद आरजेडी सरबराह लालू प्रसाद यादव और जेडीयू लीडर नीतीश कुमार जब सियासी प्लेटफॉर्म पर साथ आए तो उनका जलवा फीका रहा। पीर को हाजीपुर और समस्तीपुर की उनकी इंतिख़ाबी रैलियों में कुछ सौ लोग ही नजर आएं। साथ ही प्लेटफॉर्म पर कांग्रेस का कोई बड़ा लीडर भी नजर नहीं आया। सियासी माहिरीन का कहना है कि रियासत में 21 अगस्‍त को 10 सीटों पर होने वाले एसेंबली ज़िमनी इंतिखाब की खातिर आरजेडी, जेडीयू और कांग्रेस के दरमियान जो इत्तिहाद हुआ है, उसकी वजह से रियासत की सियासत में कई बदलाव आ सकते हैं। उधर, भाजपा ने भी इसके मद्देनजर अपनी पॉलिसी बनानी शुरू कर दी है। वह पसमांदा के खेल से खुद को आगे करने की कोशिश में है।

भाजपा की पॉलिसी

भाजपा पसमांदा का खेल शुरू कर चुकी है। उसके लीडर बार-बार कहते हैं कि भाजपा में क़ियादत पसमांदा तबके के हाथ में ही है। भाजपा लीडर आरजेडी, जेडीयू और कांग्रेस के इत्तिहाद के असर को भी खारिज कर रहे हैं। भाजपा रियासत के सदर मंगल पांडे ने कहा, ‘भाजपा का मकसद आरजेडी मुख़लिफ़ीन वोटों को मुत्तहिद करना है। वही वोट नीतीश को मिला था। अब हमें मिलेगा। जेडीयू में इत्तिहाद को लेकर नाराजगी है। वे हमारी मदद कर रहे हैं। हम हर बूथ पर 10 मेंबर, 60 प्राइमरी मेंबर तैयार कर रहे हैं।’

आगे क्‍या

ज़िमनी इंतिखाब के रिजल्ट के बाद सियासत की सिम्त फिर करवट लेगी। अच्छा रिजल्ट रहा तो इत्तिहाद 2015 के एसेंबली इंतिखाब में भी जारी रहेगा।

1994 में अलग हुए थे लालू-नीतीश

1974 में लालू और नीतीश ने साथ सियासत शुरू की थी। जनता पार्टी में लालू बड़े भाई और नीतीश छोटे भाई कहे जाते थे। 20 साल बाद 1994 में नीतीश अलग हुए और समता पार्टी बनाई। लालू पर जातिवाद और कुशासन का इलज़ाम मढ़ा और भाजपा से हाथ मिलाया। बाद में लालू ने एक इंटरव्यू में कहा था कि चारा घोटाले में मेरे खिलाफ इलज़ाम लगे तो नीतीश डर से भाग गए और भाजपा से मिल गए।

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