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लास वेगास हमलावर का दिमाग बना शोध का विषय, भेजा गया स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी

लास वेगास : लास वेगास के एक रॉक कंसर्ट के दौरान लोगों पर गोलियां बरसाने वाले हमलावर स्टीफन पैडॉक का मकसद क्या था, इस पर अभी भी सवालिया निशान लगा हुआ है. पुलिस उसके किसी भी तरह के आतंकी संपर्कों के बारे में पता नहीं लगा पाई है. 58 लोगों को मौत के घाट उतारने के बाद पैडॉक ने अपनी भी जान ले ली थी. लेकिन उसने ऐसा क्यों किया, इस सवाल का जवाब अब पुलिस पैडॉक के दिमाग के जरिये लगाना चाहती है. ऐसे में स्टीफन पैडॉक का दिमाग अमेरिका के लिए शोध का विषय बन गया है. इस काम के लिए दिमाग को कैलिफोर्निया की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी भेजा गया है.

पैडॉक के दिमाग की अटॉप्सी पहले ही हो चुकी है लेकिन इसमें पुलिस को कुछ भी खास या असामान्य नहीं मिला. इसलिए अब दिमाग को माइक्रोस्कोप के जरिये परखा जाएगा. अटॉप्सी के दौरान दिमाग को अलग अलग हिस्सों में बांटा जाता है और डॉक्टरों की प्रशिक्षित निगाहें बताती हैं कि कहीं कोई ट्यूमर या सामान्य से अलग कुछ तो नहीं है. लेकिन अब जो फोरेंसिक जांच की जाएगी उसमें जगह जगह से दिमाग के ऊतकों को निकाल कर माइक्रोस्कोप से देखा जाएगा.

इस जांच में एक महीने तक का समय लग सकता है. यहां डीएनए और तंत्रिका तंत्र संबधी बीमारियों पर ध्यान दिया जाएगा. साथ ही पता लगाया जाएगा कि पैडॉक को स्ट्रोक, मल्टीपल स्क्लेरॉसिस या मिरगी जैसी कोई बीमारी तो नहीं थी. दिमाग में किसी भी तरह के इंफेक्शन या फिर रक्त वाहिकाओं में किसी तरह की रुकावट का भी पता लगाया जाएगा. इस तरह की जांच अमेरिका में केवल हाई प्रोफाइल मामलों में ही की जाती है. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी को निर्देश दिए गए हैं कि वह जांच में खर्चे की चिंता ना करे.

हालांकि कई जानकार इसे वक्त की बर्बादी बता रहे हैं. न्यूरोसाइंटिस्ट डगलस फील्ड्स ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि मास शूटिंग और आतंकवाद से जुड़ी भयानक घटनाओं में मस्तिष्क की बीमारी का बहुत कम हाथ होता है, जरूरी नहीं है कि मानसिक रोगियों को किसी तरह की बीमारी भी हो. उनका कहना है, “जब पुलिस मकसद की खोज करती है, तो इस तरह के मामलों में यह तरीका ठीक नहीं बैठता क्योंकि ये रोष में किए गए अपराध हैं और रोष की कोई वजह नहीं होती. इस तरह के अपराध जुनून में किए जाते हैं.”

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