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लीबिया के मर्द ए आहन (फौलादी आदमी) का क़तल

लीबिया के मर्द ए आहन कर्नल मुअम्मर क़ज़ाफ़ी को गुज़शता जुमेरात के दिन एक कार्रवाई में मार दिया गया । कर्नल क़ज़ाफ़ी ने लीबिया में तक़रीबन 42 साला तवील इक़तिदार पर फ़ाइज़ रहे ।

लीबिया के मर्द ए आहन कर्नल मुअम्मर क़ज़ाफ़ी को गुज़शता जुमेरात के दिन एक कार्रवाई में मार दिया गया । कर्नल क़ज़ाफ़ी ने लीबिया में तक़रीबन 42 साला तवील इक़तिदार पर फ़ाइज़ रहे ।

जो नाटो के बाग़ीयों के हाथों बेदर्दी से क़तल कर दिए गए । उन के आख़िरी बेबस लमहात क़लमबंद कर के दुनिया में पहुंचाए गए जिस को देख कर दुनिया काँप उठी ।

इस से क़बल इराक़ के सदर सद्दाम हुसैन के साथ भी ऐसा ही किया गया था । क़ज़ाफ़ी और सद्दाम हुसैन दोनों ने अपने मुल्कों में ऐटमी क़ुव्वत बनाने की कोशिश की ।

कर्नल क़ज़ाफ़ी को साल 1996-ए- में भी क़तल करने की कोशिश की गई थी जिस में वो महफ़ूज़ रहे लेकिन 14बेगुनाह अफ़राद मारे गए थे ।

मुअम्मर क़ज़ाफ़ी का ख़ानदान चाहता था कि इन की मय्यत की तदफ़ीन ख़ुद करे ताहम उन की नाश को एक बड़े मार्किट के फ्ऱेज़र में रख कर अवाम को दीदार का मौक़ा फ़राहम किया गया ।

बादअज़ां सहरा के एक खु़फ़ीया मुक़ाम पर इस्लामी तरीक़ा से तदफ़ीन अमल में लाई गई । याद रहे कि नाटो ने लीबिया के अवाम को बचाने के बहाने इस मुल्क पर फ़िज़ाई हमला शुरू करदिया था ।

मगर उन्हों ने वहां के बाग़ीयों का भरपूर साथ दिया और जुमेरात के रोज़ फ़्रांसीसी जंगी जहाज़ों ने क़ज़ाफ़ी के क़ाफ़िला पर जब वो सीरत से बाहर जा रहे थे कि हमला कर के उन्हें क़तल कर डाला ।

क़ाफ़िला के गाड़ियां और ट्रक जल कर ख़ाकसतर हो गए और उन गाड़ीयों में सवार लोग वहीं ढेर हो गए । क़ज़ाफ़ी सड़क के ज़ीरीं हिस्सा में क़ायम एक नाले में छिपॆ हुए पकड़े गए थे जिस के बाद उन के साथ इंतिहाई बे रहमाना सुलूक किया गया और बेदर्दी से मारा गया ।

लीबिया की नई हुकूमत का कहना है कि क़ज़ाफ़ी अम्बुलॆन्स् में ज़ख़मों से ताब ना ला सके जबकि अम्बुलॆन्स् ड्राईवर का कहना है कि इस ने जब क़ज़ाफ़ी को अम्बुलॆन्स् में डाला था तो तब वो मर चुके थे ।

बिन ग़ाज़ी में क़ौमी उबूरी कौंसल के अरकान को हथियारों की फ़राहमी और क़ज़ाफ़ी की बेदख़ली के लिए ग़ैर मुल्की मुदाख़िलत का जो भयानक खेल खेला गया इस पर सारी दुनिया ख़ामोश है ।

अगर यही तरीक़ा कोई अरब हुक्मराँ किसी मलिक के ख़िलाफ़ करता तो उसे दहश्तगर्द क़रार दिया जाता जबकि मग़रिबी दुनिया ने बन ग़ाज़ी के रास्ता लीबिया के अंदर बग़ावत को हुआ दे कर तबदीली लाने का आलमी गुंडा कर दी का मुज़ाहरा किया लेकिन इस का किसी ने नोट नहीं लिया ।

क़ज़ाफ़ी ने अह्द किया था कि वो जंग के दौरान मैदान छोड़कर नहीं भागेंगे । इस अज़म के मुताबिक़ उन्हों ने ऐसा ही किया है ।

क़ज़ाफ़ी के क़तल के बाद लीबा के नए हुकमरानों ने मलिक को मुअम्मर क़ज़ाफ़ी की 42 साला आमिराना हुकूमत से आज़ादी का ऐलान करदिया और कहा कि वक़्त का फ़िरऔन तारीख़ के कूड़ेदान की नज़र हो चुका है ।

बाअज़ मुस्लमान इस बात को नापसंद कररहे हैं कि क़ज़ाफ़ी की शरई उसूलों के मुताबिक़ तदफ़ीन नहीं की गई ताहम दूसरी तरफ़ उबूरी हुकूमत का दावा है कि वो तमाम गवाहों के सबूत के साथ सहरा के खु़फ़ीया मुक़ाम पर शरई उसूलों के मुताबिक़ नमाज़ जनाज़ा और तदफ़ीन अमल में लाई गई ।

क़ज़ाफ़ी और इस के हामीयों के साथ जिस तरह का सुलूक रवा रखा गया इस से लीबिया के नए हुकमरानों के इस वाअदे पर शक हो रहा है कि वो इंसानी हुक़ूक़ का एहतिराम करेंगे और इंतिक़ामी कार्रवाई को रोकेंगे ।

क़ज़ाफ़ी के ख़ानदान के जिलावतन अरकान चाहते हैं कि क़ज़ाफ़ी और मोतसिम की लाशें सुरत के क़बाईल सरदारों के हवाले किया जाय । ताहम ऐसा नहीं किया गया ।

दूसरी तरफ़ उबूरी हुकूमत ने किसी खु़फ़ीया मुक़ाम पर उन की तदफ़ीन करते हुए अवाम को इस मुक़ाम से नावाक़िफ़ रखा है । यहां इस बात का ज़िक्र बेजा ना होगा कि मुअम्मर क़ज़ाफ़ी के 8 बच्चों में से 3 की लीबिया के माज़ूल क़ाइद की तरह मौत वाक़्य हो गई थी । बजे जिलावतनी की ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं और एक फ़रार है । क़ज़ाफ़ी के बच्चों की तफ़सीलात इस तरह हैं ।

मोतसिम क़ज़ाफ़ी जो कभी क़ौमी सलामती मुशीर थे उन की क़ज़ाफ़ी के आख़िरी गढ़ सिरत के क़रीब उन के वालिद के हमराह मौत वाक़्य हो गई । जंग के दौरान ख़मीस क़ज़ाफ़ी की मौत के बारे में तजस्सुस पैदा हो गया था ।

जारीया माह के अवाइल के दौरान ये तौसीक़ की थी कि इन की 29अगस्त को तरीपोली के जुनूबी मशरिक़ में लड़ाई के दौरान मौत वाक़्य हो गई ।

सैफ अलारब तरीपोली में नाटो की बमबारी के दौरान हलाक होगए । वो जब 4बरस के थे 986 के दौरान सदर अमरीका रोनालड रीगन के हुक्म पर उन के वालिद की क़ियामगाह पर किए गए फ़िज़ाई हमला में ज़ख़मी हो गए थे ।

सादी क़ज़ाफ़ी सितंबर के दौरान नाईजर या फ़रार हो गए । हिना बेले क़ज़ाफ़ी पहली बीवी और दुख़तर के इलावा एक और फ़र्ज़ंद मुहम्मद के साथ अगस्त में अल्जीरिया फ़रार हो गए थे ।

मुहम्मद क़ज़ाफ़ी जो मुअम्मर क़ज़ाफ़ी के बेटे हैं और उन की पहली बीवी से पैदा हुए थे । आईशा क़ज़ाफ़ी जो मुअम्मर क़ज़ाफ़ी की दुख़तर हैं वो भी अगस्त के दौरान अल्जीरिया मुंतक़िल हो गए थे ।

बहरहाल इस वाक़िया से इस बात का साफ़ इज़हार होता है कि लीबिया के मरदाहन हुक्मराँ को जंगी रहनुमा या ना ख़ुतूत के मुताबिक़ नहीं बल्कि बे रहमाना अंदाज़ में क़तल कर दिया गया जिस से सारी दुनिया काँप उठी है ।

मुअम्मर क़ज़ाफ़ी को ज़िंदा पकड़ कर उन्हें सज़ा देने केलिए बैन-उल-अक़वामी मयार के मुताबिक़ उन के ख़िलाफ़ मुक़द्दमा चलाया जा सकता था लेकिन ऐसा नहीं किया गया । मुअम्मर क़ज़ाफ़ी को क़तल करने के वाक़िया पर अवाम के ग़ैज़-ओ-ग़ज़ब के पेशे नज़र बैन-उल-अक़वामी इंसानी हुक़ूक़ तंज़ीमों ने इस की मुकम्मल जांच पड़ताल का मुतालिबा किया तो लीबिया की उबूरी हुक्मराँ ने इस की तहक़ीक़ करने का ऐलान किया ।

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