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लोक सभा और असेम्बलीयों के इंतेख़ाबात

नई दिल्ली: एक पार्लीमानी कमेटी ने मुल्क भर में बैयकवक़्त असेम्बलीयों और पार्लियामेंट के इंतेख़ाबात मुनाक़िद करवाने की परज़ोर वकालत की है और ये तजवीज़ पेश की कि ये काम मुस्तक़बिल क़रीब अंजाम दिया जा सकता है। ताहम बेशतर सियासी जमातों ने क़ायमा कमेटी के सवालनामा के जवाब देते हुए कहा कि बज़ाहिर ये मक़सद तो नेक है लेकिन अमलावरी मुश्किल है।

अगर कमेटी का ये एहसास है कि मुस्तक़बिल क़रीब में हर पाँच साल में एक मर्तबा बैवक़्त असेम्बली और लोक सभा के इंतेख़ाबात मुनाक़िद नहीं किए जा सकते लेकिन बतदरीज इस सिम्त में पेशरफ़त की जा सकती है। जहां पर रियासती असेम्बलीयों की मीयाद मुकम्मल और तख़फ़ीफ़ या तौसी हो सकती है ला ऐंड पर्सोनल ( क़ानून और सरकारी अमला ) से मुताल्लिक़ असिस्टनिंग‌ कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि रियासती असेम्बलीयों और लोक सभा के इंतेख़ाबात  मुनाक़िद करने की तजवीज़ काबुल अमल है।

पार्लियामेंट में आज पेश करदा रिपोर्ट में कहा गया है कि इंतेख़ाबी क़वाइद के मुताबिक़ ऐवान की तकमील मीयाद से 6माह क़बल भी इंतेख़ाबात मुनाक़िद करवाए जा सकते हैं। ताहम एमरजेंसी के नफ़ाज़ की सूरत में ऐवान की मीयाद में तौसी नहीं दी जा सकती। कमेटी ने बैवक़्त इंतेख़ाबात मुनाक़िद करवाने के लिए मुतबादिल और काबुल अमल तरीका-ए-कार की सिफ़ारिश की है।

अलावा अज़ीं कमेटी ने पार्लियामेंट के वस्त मुद्दती और बाज़ असेम्बलीयों के इंतेख़ाबात के मुख़्तलिफ़ पहलुओं का भी जायज़ा लिया ताहम इस अंदेशे का भी इज़हार किया कि मज़कूरा सिफ़ारिशात पर तमाम सियासी जमातों की इत्तेफ़ाक़ राय नहीं हो सकती। पार्लियामेंट में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने इन तजावीज़ को मुस्तरद कर दिया जबकि अन्ना डी एम के, आसाम गण परिषद और शिरोमणि अकाली दल ने ताईद की है और उन सी पी ने उसे नाक़ाबिल अमल क़रार दिया तो सी पी आई ने ज़हनी तहफ़्फुज़ात का इज़हार किया है।

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