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वक़्फ़ इम्लाक को तिजारती ख़ुतूत पर फ़रोग़ दिया जाये

नई दिल्ली, 26 जून: (पी टी आई) वज़ीर इकलेती उमूर के रहमान ख़ान ने वक़्फ़ जायदादों और फंड्स की मूसिर-ओ-शफ़्फ़ाफ़ अंदाज़ में देख भाल के लिए एक जामि निज़ाम की ज़रूरत पर ज़ोर दिया ।उन्होंने आज रियासती वक़्फ़ बोर्ड्स के एक इजलास से ख़िताब करते हुए कह

नई दिल्ली, 26 जून: (पी टी आई) वज़ीर इकलेती उमूर के रहमान ख़ान ने वक़्फ़ जायदादों और फंड्स की मूसिर-ओ-शफ़्फ़ाफ़ अंदाज़ में देख भाल के लिए एक जामि निज़ाम की ज़रूरत पर ज़ोर दिया ।उन्होंने आज रियासती वक़्फ़ बोर्ड्स के एक इजलास से ख़िताब करते हुए कहा कि वक़्फ़ एक्ट 1995 के बाअज़ अहम शक़ पर अमल आवरी में तेज़ी लाने की भी ज़रूरत है।

के रहमान ख़ान जो सेंटर्ल वक़्फ़ कौंसल के सदर नशीन भी हैं, कहा कि वक़्फ़ इम्लाक का मूसिर तहफ़्फ़ुज़ और इंतेज़ाम ना सिर्फ़ हमारी ज़िम्मेदारी है बल्कि इसके ज़रीया अवाम की ख़िदमत का भी मौक़ा फ़राहम होगा। उन्होंने मुल्क भर में वसीअ-ओ-अरीज़ वक़्फ़ आराज़ीयात से मूसिर इस्तिफ़ादे की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा कि इन जायदादों को तिजारती ख़ुतूत पर फ़रोग़ देते हुए इकलेती फ़िर्क़ा की बहबूद के लिए ज़्यादा रक़म हासिल की जा सकती है।

उन्होंने रियासती वक़्फ़ बोर्डस को हिदायत दी कि ओक़ाफ़ी जायदादों के सर्वे और रिकॉर्ड्स के कम्पयूट्राइज़ेशन का काम आइन्दा तीन माह के अंदर मुकम्मल कर लें। उन्होंने तमाम रियासती नुमाइंदों से अपील की कि वो इस बात को यक़ीनी बनाए कि वक़्फ़ से मुताल्लिक़ तमाम उमूर की ऑडिट हो। ट्रब्यूनल मूसिर तौर पर काम करें और ओक़ाफ़ी जायदादों को तिजारती बुनियादों पर फ़रोग़ दिया जाये।

उन्होंने कहा कि ओक़ाफ़ी जायदादों के तहफ़्फ़ुज़, आमदनी और इंतिज़ाम-ओ-इंसिराम को बेहतर बनाने के लिए इन महाज़ों पर सख़्ती से अमल करना ज़रूरी है।

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